Teachers Day पर Sachin Tendulkar हुए भावुक, पिता रमेश तेंदुलकर को याद कर शुरू की खास फेलोशिप।

भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के लिए इस बार का शिक्षक दिवस बेहद खास रहा. 5 सितंबर को मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस के अवसर पर सचिन ने अपने पिता रमेश तेंदुलकर को याद किया और बताया कि उनके जीवन में उनके पिता की भूमिका सिर्फ एक पिता की नहीं, बल्कि एक शिक्षक, मेंटर और गाइड की भी रही.
सचिन ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के साथ तस्वीर साझा करते हुए उनके योगदान को याद किया. उन्होंने बताया कि जब दुनिया उन्हें नहीं जानती थी, तब उनके पिता ने उनके अंदर क्रिकेट के प्रति जुनून को पहचाना था.
सचिन के मुताबिक, उनके पिता ने कभी यह तय करने की कोशिश नहीं की कि उन्हें क्या बनना चाहिए. उन्होंने उन्हें अपने रास्ते को खुद तलाशने की आजादी दी और उनके फैसलों पर भरोसा किया.
‘मेरी शुरुआत क्रिकेट के मैदान से नहीं, घर से होती है’
सचिन ने अपने संदेश में बताया कि जब वह अपने जीवन को प्रभावित करने वाले लोगों के बारे में सोचते हैं, तो उनकी यादों की शुरुआत क्रिकेट के मैदान या किसी कोच से नहीं, बल्कि अपने घर से होती है. उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए बताया कि रमेश तेंदुलकर ने सबसे पहले उनके क्रिकेट प्रेम को समझा था. उस समय यह तय नहीं था कि सचिन आगे चलकर क्रिकेट में कितना बड़ा नाम बनाएंगे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें इस खेल को आगे बढ़ाने का पूरा अवसर दिया. यही भरोसा सचिन के जीवन में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ.
पिता ने सिखाया- सफलता से ज्यादा जरूरी है चरित्र
सचिन ने अपने पिता से मिली सीख को भी याद किया. उन्होंने बताया कि रमेश तेंदुलकर उन्हें हमेशा ईमानदारी और सही रास्ते पर चलने की सीख देते थे. उनके पिता का मानना था कि जीवन में हारना गलत नहीं है, लेकिन धोखा देना गलत है. उन्होंने सचिन को शॉर्टकट से बचने और मेहनत के रास्ते पर आगे बढ़ने की सीख दी. सचिन के मुताबिक, बचपन में उनके पिता द्वारा कही गई कई बातें ऐसी थीं, जो जीवनभर उनके साथ रहीं. यही वजह है कि सचिन अपने पिता को केवल एक अभिभावक नहीं, बल्कि अपने शुरुआती जीवन का एक महत्वपूर्ण शिक्षक और मार्गदर्शक मानते हैं.
‘एक महान शिक्षक आपकी क्षमता को पहचानता है’
सचिन ने शिक्षक और मेंटर की भूमिका को समझाते हुए कहा कि एक अच्छा शिक्षक वह होता है जो किसी व्यक्ति के अंदर मौजूद उस क्षमता को पहचान लेता है, जिसे वह व्यक्ति खुद भी शायद नहीं पहचान पाता. उनके पिता ने भी उनके साथ कुछ ऐसा ही किया. उन्होंने सचिन पर कोई रास्ता थोपने के बजाय उन्हें अपनी क्षमता तलाशने और उसे आगे बढ़ाने की आजादी दी.
सचिन का मानना है कि देश में युवा प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. चाहे कोई बच्चा खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता हो, पढ़ाई में बेहतर करना चाहता हो या किसी अन्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहता हो, उसे सही मार्गदर्शन और अवसर की जरूरत होती है.
हर बच्चे तक अवसर पहुंचाने की कोशिश
सचिन ने अपने संदेश में यह भी बताया कि भारत में कई ऐसे बच्चे हैं जिनमें प्रतिभा तो है, लेकिन उन्हें अपनी क्षमता को पहचानने और उसे निखारने के लिए जरूरी संसाधन नहीं मिल पाते. कई बच्चों को अच्छे कोच, मेंटर, बेहतर शिक्षा या बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं मिलती. ऐसे में प्रतिभा होने के बावजूद उनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है.
सचिन तेंदुलकर और उनकी पत्नी अंजलि द्वारा शुरू किए गए फाउंडेशन का उद्देश्य ऐसे बच्चों तक खेल, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा से जुड़े अवसर पहुंचाने की दिशा में काम करना है.
शुरू हुई ‘प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर मेमोरियल फेलोशिप’
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन ने अपने लंबे समय से जुड़े हेल्थकेयर पार्टनर इंगा हेल्थ फाउंडेशन के साथ मिलकर ‘प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर मेमोरियल फेलोशिप’ शुरू करने की घोषणा की है.
इस फेलोशिप के तहत हर साल एक MD (Doctor of Medicine) को श्रीनगर में क्लेफ्ट और क्रेनियोफेशियल केयर में एक साल की विशेषज्ञता हासिल करने के अवसर के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी. कार्यक्रम पूरा करने के बाद फेलो को उनकी बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की ओर से प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा.
मेडिकल क्षेत्र में युवा डॉक्टरों को मिलेगा प्रोत्साहन
इस फेलोशिप का उद्देश्य केवल एक छात्र को आर्थिक मदद देना नहीं है. इसके जरिए मेडिकल क्षेत्र में युवा डॉक्टरों को विशेषज्ञता हासिल करने और अपने ज्ञान का इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए करने का अवसर देने की कोशिश की जा रही है.
सचिन ने इसे अपने पिता की सोच को आगे बढ़ाने का एक माध्यम बताया. उनके अनुसार, उनके पिता का शिक्षा में गहरा विश्वास था और वह मानते थे कि शिक्षा लोगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है.
पिता की सीख को आगे बढ़ाने की कोशिश
सचिन तेंदुलकर के लिए यह फेलोशिप उनके पिता को याद करने से कहीं ज्यादा है. यह उनके पिता की उस सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिसमें शिक्षा और सही मार्गदर्शन के जरिए किसी व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने की बात शामिल थी.
सचिन ने अपने संदेश में उम्मीद जताई कि जिस तरह उनके पिता ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और अपना रास्ता चुनने का आत्मविश्वास दिया, उसी तरह दूसरे बच्चों और युवाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक शिक्षक की सीख का असर केवल एक छात्र तक सीमित नहीं रहता. वह सीख आगे कई लोगों और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकती है.
सचिन के लिए भावुक रहा शिक्षक दिवस
क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर ने भले ही अपनी अलग पहचान बनाई हो, लेकिन उनके मुताबिक इस सफर की नींव उनके परिवार और खासतौर पर उनके पिता ने रखी थी. इस शिक्षक दिवस पर अपने पिता को याद करते हुए सचिन ने न सिर्फ उनके योगदान को श्रद्धांजलि दी, बल्कि उनकी शिक्षाओं को समाज तक पहुंचाने की एक पहल भी शुरू की. ‘प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर मेमोरियल फेलोशिप’ इसी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश है—जहां शिक्षा, चिकित्सा और सेवा के जरिए युवाओं को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिल सके.
