UPI चार्ज पर अशनीर ग्रोवर ने उठाए सवाल! 💸📱 बोले- बड़े ट्रांजैक्शन फ्री तो छोटे दुकानदारों से चार्ज क्यों?

UPI ट्रांजैक्शन को लेकर सामने आए नए फैसले ने डिजिटल पेमेंट को लेकर बहस तेज कर दी है। इसी मुद्दे पर BharatPe के पूर्व फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर UPI सिस्टम को चलाने की लागत ट्रांजैक्शन के आकार से नहीं बदलती, तो अलग-अलग तरह के भुगतान पर अलग नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं। अशनीर ने इस मुद्दे पर एक डिबेट के दौरान अपनी राय रखी और सरकार के फैसले को लेकर कई सवाल उठाए।
अशनीर ग्रोवर ने किस बात पर जताई आपत्ति…..?
अशनीर ग्रोवर के मुताबिक, UPI से किसी दोस्त को बड़ी रकम भेजने और किसी दुकानदार को छोटी रकम का भुगतान करने में सिस्टम चलाने की लागत में बहुत बड़ा अंतर नहीं होता। ऐसे में उनका सवाल है कि व्यक्तिगत लेन-देन को मुफ्त रखते हुए दुकानदारों से भुगतान पर शुल्क लेने का तर्क क्या है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त को 1 लाख रुपये UPI से भेजता है या किसी QR कोड के जरिए दुकान पर भुगतान करता है, तो दोनों ही मामलों में डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल होता है। उनके मुताबिक, इसी आधार पर शुल्क व्यवस्था को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
सरकार के खर्च पर भी उठाया सवाल…..
अशनीर ने UPI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के खर्च का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर खर्च होने की बात करती है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वास्तविक आर्थिक बोझ किस पर पड़ रहा है। स्रोत के मुताबिक, उन्होंने RBI, बैंकों और NPCI से जुड़े वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि अगर इन संस्थाओं की कमाई और सरकार को मिलने वाले राजस्व को भी ध्यान में रखा जाए, तो UPI सिस्टम में नुकसान की भरपाई छोटे कारोबारियों से क्यों कराई जानी चाहिए।
UPI सब्सिडी को लेकर भी अलग राय…..
बहस के दौरान सरकार की ओर से 2021 से 2025 के बीच UPI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दी गई करीब 8,700 करोड़ रुपये की सब्सिडी का मुद्दा भी सामने आया। अशनीर ने इस आंकड़े की व्याख्या पर असहमति जताई। उनका कहना था कि UPI इकोसिस्टम से जुड़े संस्थानों और बैंकों से सरकार को मिलने वाले टैक्स और अन्य राजस्व को भी पूरी तस्वीर में शामिल किया जाना चाहिए। उनके ये आंकड़े और दावे इस डिबेट में दिए गए उनके पक्ष का हिस्सा हैं और इन्हें सरकारी आंकड़ों के समान आधिकारिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
दुकानदारों पर असर को लेकर चिंता…..
UPI आज छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक QR कोड के जरिए पेमेंट आम हो चुका है। ऐसे में अगर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क व्यापारियों पर लागू होता है, तो इसका असर उनके भुगतान खर्च पर पड़ सकता है। यही वजह है कि UPI से जुड़े शुल्क के नियमों को लेकर व्यापारियों और आम यूजर्स के बीच चर्चा बढ़ी है।
क्या हर UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज…..?
स्रोत में बताए गए फैसले के मुताबिक, बहस मुख्य रूप से 2,000 रुपये से ऊपर के कुछ UPI भुगतान पर संभावित शुल्क व्यवस्था को लेकर है। अलग-अलग प्रकार के UPI ट्रांजैक्शन के लिए नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी भुगतान पर शुल्क लागू होने की स्थिति को समझने के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना और अंतिम नियमों को देखना जरूरी है। व्यक्तिगत UPI ट्रांसफर और मर्चेंट पेमेंट को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।
डिजिटल पेमेंट को लेकर क्यों अहम है यह बहस…..?
भारत में UPI ने डिजिटल भुगतान को बेहद आसान बनाया है। छोटे कारोबारियों और आम लोगों के लिए QR कोड के जरिए भुगतान करना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में शुल्क से जुड़े किसी भी बदलाव का असर सिर्फ कारोबारियों पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल पेमेंट की लागत और इस्तेमाल की आदतों पर भी पड़ सकता है। इसी कारण सरकार के फैसले और अशनीर ग्रोवर जैसे कारोबारी विशेषज्ञों की आपत्तियों को लेकर चर्चा तेज है।
निष्कर्ष……
UPI चार्ज को लेकर अशनीर ग्रोवर ने सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए छोटे दुकानदारों पर पड़ने वाले संभावित बोझ का मुद्दा उठाया है। वहीं, इस विषय पर अंतिम तस्वीर समझने के लिए UPI के अलग-अलग ट्रांजैक्शन प्रकार और लागू नियमों को देखना जरूरी है। डिजिटल पेमेंट के दौर में शुल्क व्यवस्था किस तरह तय होती है, इसका असर करोड़ों यूजर्स और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है।
