2 से 4 किलो तक वजन वाला नूरजहां आम आखिर सबसे ज्यादा कहां उगाया जाता है?

भारत में आम की सैकड़ों किस्में उगाई जाती हैं, लेकिन जब सबसे बड़े और सबसे खास आमों की बात होती है तो नूरजहां आम का नाम सबसे पहले लिया जाता है। अपने विशाल आकार, आकर्षक रंग, बेहतरीन मिठास और सीमित उत्पादन के कारण यह आम देश की सबसे प्रीमियम किस्मों में गिना जाता है।
एक नूरजहां आम का वजन सामान्य तौर पर 2 से 4 किलोग्राम तक हो सकता है। कई बार अनुकूल मौसम में इसका वजन इससे भी अधिक दर्ज किया गया है। यही वजह है कि यह आम बाजार में ऊंची कीमत पर बिकता है और किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बनता है।
सबसे ज्यादा कहां होती है नूरजहां आम की खेती?
नूरजहां आम की सबसे अधिक पहचान मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र से जुड़ी हुई है। इस इलाके की जलवायु, मिट्टी और तापमान इस विशेष किस्म के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं।
कट्ठीवाड़ा में वर्षों से नूरजहां आम की खेती की जा रही है और देशभर में मिलने वाला अधिकांश असली नूरजहां आम इसी क्षेत्र से आता है। इसके अलावा आसपास के कुछ सीमित इलाकों में भी इसकी खेती होती है, लेकिन उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहता है।
यह देर से पकने वाली किस्म है और सामान्यतः जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के बीच बाजार में पहुंचती है।
क्यों होती है इसकी इतनी ज्यादा मांग?
नूरजहां आम का उत्पादन सीमित होता है, जबकि इसकी मांग देशभर में बनी रहती है। बड़े आकार और शानदार स्वाद के कारण व्यापारी अक्सर फसल तैयार होने से पहले ही बाग मालिकों से इसकी बुकिंग कर लेते हैं।
बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाला नूरजहां आम सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर बिकता है। इसी कारण यह किसानों के लिए लाभदायक बागवानी फसल मानी जाती है।
नूरजहां आम की खेती कैसे करें?
यदि किसान नूरजहां आम की खेती करना चाहते हैं, तो उन्हें कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. सही मिट्टी का चयन
इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों में सड़न और पौधों को नुकसान हो सकता है।
2. पौधे लगाने का सही समय
मानसून की शुरुआत नूरजहां आम के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस दौरान नमी पर्याप्त रहती है, जिससे पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है।
3. पर्याप्त दूरी रखें
नूरजहां आम के पेड़ बड़े आकार के होते हैं, इसलिए पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना आवश्यक है। इससे पेड़ों को फैलने की जगह मिलती है और धूप व हवा का उचित प्रवाह बना रहता है।
4. सिंचाई और खाद प्रबंधन
समय-समय पर सिंचाई करना, जैविक खाद का उपयोग, संतुलित उर्वरकों का प्रयोग और नियमित देखभाल पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए जरूरी है।
5. कीट एवं रोग नियंत्रण
फल बनने के दौरान कीट और रोगों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। समय पर नियंत्रण करने से उत्पादन और फलों की गुणवत्ता दोनों बेहतर रहती हैं।
6. नियमित छंटाई
पेड़ों की समय-समय पर छंटाई करने से नई शाखाओं का विकास बेहतर होता है और फल उत्पादन में भी सुधार आता है।
कब शुरू होता है उत्पादन?
नूरजहां आम के पेड़ अच्छी देखभाल मिलने पर कुछ वर्षों बाद फल देना शुरू कर देते हैं। परिपक्व होने के बाद पेड़ हर वर्ष बड़े आकार और उच्च गुणवत्ता वाले फल देने लगते हैं।
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है यह किस्म?
कम उत्पादन और अधिक मांग के कारण नूरजहां आम किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाता है। यदि आधुनिक बागवानी तकनीकों और वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती की जाए तो यह सामान्य आम की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक साबित हो सकती है।
