ग्वालियर में प्राइवेट डंपर पर लिखा था ‘नगर निगम ग्वालियर’, सफाई के बजाय नाली में ही डाल रहा था सिल्ट।

जरा सोचिए… आप सड़क से गुजर रहे हैं, सामने एक गाड़ी खड़ी है जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है—नगर निगम ग्वालियर। आप राहत की सांस लेते हैं कि चलो, सरकारी अमला शहर को साफ करने के काम में जुटा है। लेकिन तभी… एक जोरदार ट्विस्ट आता है! वह गाड़ी जिसे आप सरकारी समझ रहे थे, वो असल में निजी निकलती है।
और काम? शहर को साफ करने का नहीं, बल्कि साफ नाली में दोबारा कचरा डाल उसे और गंदा करने का!
मामला है हमारे ग्वालियर शहर का। रविवार की चमचमाती सुबह थी। अमूमन इस दिन लोग छुट्टी का आनंद लेते हैं, लेकिन निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी शहर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मेला ग्राउंड रोड पर निरीक्षण करने निकले थे। तभी उनकी नजर एक ऐसे नजारे पर पड़ी जिसने उनके होश उड़ा दिए। सामने एक डंपर खड़ा था, जिस पर साफ लिखा था नगर निगम। लेकिन उसका चालक किसी नेक काम को अंजाम नहीं दे रहा था, बल्कि नाली के किनारे सीवर की गाद यानी सिल्ट को वापस उड़ेल रहा था।
जैसे ही कमिश्नर साहब ने इस लापरवाही को अपनी आंखों से देखा, उन्होंने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने मौके पर ही संज्ञान लेते हुए गाड़ी को जब्त करने के आदेश दे दिए।
उपायुक्त स्वास्थ्य मुकेश बंसल ने स्वास्थ्य अधिकारी भीष्म पमनानी को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। नतीजा? निगम का अमला हरकत में आया, गाड़ी को अपने कब्जे में लिया और सीधे वर्कशॉप भिजवा दिया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती, असली सस्पेंस तो इसके बाद शुरू हुआ। जब गाड़ी के कागजात और उसकी कुंडली खंगाली गई, तो एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। वह गाड़ी नगर निगम की थी ही नहीं! वो तो एक निजी गाड़ी थी, जो किसी नरेंद्र भदौरिया नाम के व्यक्ति की बताई जा रही है, और वहां ठेकेदार अजय सिंह राठौर के तहत काम चल रहा था।अब सवाल यह उठता है कि अगर गाड़ी प्राइवेट थी, तो उस पर ‘नगर निगम ग्वालियर’ लिखने की हिम्मत किसने और किसकी अनुमति से की? क्या यह सिर्फ टैक्स और चेकिंग से बचने का हथकंडा था या फिर इसके पीछे कोई और गहरा खेल है?
ग्वालियर में सीवर सफाई के नाम पर ठेकेदारों की मनमानी कोई नई बात नहीं है। कर्मचारी सीवर साफ करने के बाद गंदी सिल्ट को सड़क किनारे ही छोड़ देते हैं। इससे बीमारी फैलने का खतरा लगातार बना रहता है और आम लोग परेशान होते हैं। सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति और ऊपर से सरकारी नाम का ऐसा गलत इस्तेमाल! इस कार्रवाई के बाद अब शहर में कई गंभीर सवाल तैर रहे हैं।
कमिश्नर की इस मुस्तैदी ने एक बड़े फर्जीवाड़े को तो पकड़ लिया है, लेकिन देखना यह होगा कि क्या ऐसे ठेकेदारों और गाड़ी मालिकों पर सिर्फ गाड़ी जब्ती तक की कार्रवाई होगी या फिर कोई कड़ा कानूनी सबक भी सिखाया जाएगा? क्योंकि शहर की सेहत और सरकारी नाम के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
