घर में रखा सोना अब कमाई का जरिया? 🪙 Gold Monetisation Scheme से जुड़ी जरूरी बातें जानें और समझें कि इसमें कैसे मिलता है रिटर्न।

निवेश के लिए FD और SIP जैसे विकल्प काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन अगर आपके पास घर में सोना पड़ा है तो उसे भी कमाई का जरिया बनाया जा सकता है। सरकार ने साल 2015 में Gold Monetisation Scheme (GMS) शुरू की थी, जिसका मकसद घरों और संस्थानों में पड़े निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाना और लंबे समय में सोने के आयात पर निर्भरता कम करना था। इस समय सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में एक नई सरकारी योजना की चर्चा हो रही है, जिसमें लोगों के गहने, सिक्के या बार सर्टिफाइड ज्वैलर्स के जरिए जमा कराने की बात कही जा रही है। ऐसी नई योजना का अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इसलिए इसे मौजूदा Gold Monetisation Scheme से अलग समझना जरूरी है।
क्या है Gold Monetisation Scheme….?
Gold Monetisation Scheme के तहत व्यक्ति अपने पास मौजूद सोने को निर्धारित प्रक्रिया के जरिए जमा कर सकता है। सोने की शुद्धता की जांच BIS से मान्यता प्राप्त Collection and Purity Testing Centre (CPTC) पर की जाती है और जमा किए गए सोने के बदले डिपॉजिट सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। योजना का उद्देश्य घरों में पड़े सोने को उत्पादक इस्तेमाल में लाना है, ताकि इससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा मिले और सोने के आयात की जरूरत कम हो।
क्या सोने पर ब्याज मिलता है….?
मौजूदा व्यवस्था में Short-Term Bank Deposit (STBD) विकल्प के तहत बैंक सोने के डिपॉजिट पर ब्याज देते हैं। इसकी ब्याज दर संबंधित बैंक द्वारा बाजार परिस्थितियों, लागत और अन्य कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती है। इसलिए इसे FD की तरह एक तय सरकारी ब्याज दर वाली योजना समझना सही नहीं है। अलग-अलग समय और बैंक के हिसाब से मिलने वाला ब्याज अलग हो सकता है।
बड़ी बात: पुरानी योजना में बदलाव हो चुका है….
यहां एक महत्वपूर्ण अपडेट है। सरकार ने 26 मार्च 2025 से Gold Monetisation Scheme के Medium Term Government Deposit और Long Term Government Deposit विकल्प बंद कर दिए थे। इसके बाद Short-Term Bank Deposit विकल्प बैंकों की व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर जारी रह सकता है। इसलिए अगर कहीं यह दावा किया जा रहा है कि अभी भी 5-7 साल या 12-15 साल वाली सरकारी गोल्ड डिपॉजिट स्कीम में नए निवेश किए जा सकते हैं, तो उस जानकारी को सावधानी से जांचना चाहिए।
कितना सोना जमा कर सकते हैं….?
Gold Monetisation Scheme में पहले किए गए संशोधनों के तहत न्यूनतम जमा मात्रा को 10 ग्राम तक किया गया था। सोने की शुद्धता की जांच के बाद उसे 995 फाइननेस के बराबर सोने के रूप में डिपॉजिट सर्टिफिकेट में दर्ज किया जाता है। मौजूदा समय में कौन-सा बैंक यह सुविधा दे रहा है और उसकी शर्तें क्या हैं, यह बैंक की उपलब्धता और मौजूदा नियमों पर निर्भर करता है।
सरकार घरों में पड़े सोने को क्यों बाजार में लाना चाहती है….?
भारत में बड़ी मात्रा में सोना घरों और संस्थानों के पास मौजूद है। सरकार की Gold Monetisation Scheme का मूल उद्देश्य इसी निष्क्रिय सोने को आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल करना है। अगर घरों में रखा सोना औपचारिक व्यवस्था में आता है, तो इससे सोने के आयात पर निर्भरता कम करने और देश में उपलब्ध सोने का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
क्या यह FD से बेहतर है….?
यह कहना सही नहीं होगा कि Gold Monetisation Scheme हर निवेशक के लिए FD से बेहतर है। FD में आपको रुपये जमा करने होते हैं और बैंक तय ब्याज दर के आधार पर रिटर्न देता है। Gold Monetisation में आपके पास पहले से मौजूद सोना जमा होता है और रिटर्न की संरचना अलग होती है। इसमें सोने की शुद्धता, डिपॉजिट की अवधि, बैंक की ब्याज दर और रिडेम्पशन की शर्तों को समझना जरूरी है। इसलिए सिर्फ ज्यादा ब्याज के दावे के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।
2025 तक कितने सोने का हुआ इस्तेमाल….?
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2025 तक Gold Monetisation Scheme के तहत करीब 39,044 किलोग्राम सोना मोबिलाइज किया गया था। यह आंकड़ा बताता है कि योजना के जरिए बड़ी मात्रा में सोना औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में आया है, सरकार ने 2025 में योजना के कुछ लंबे अवधि वाले विकल्प बंद कर दिए।
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान….
अगर आप घर में रखा सोना जमा करके ब्याज कमाने के बारे में सोच रहे हैं, तो सबसे पहले यह जांचें कि आपके बैंक में Gold Monetisation Scheme का Short-Term Bank Deposit विकल्प उपलब्ध है या नहीं। इसके अलावा सोने की शुद्धता जांच, ब्याज दर, लॉक-इन अवधि, समय से पहले निकासी और मैच्योरिटी पर सोना या रुपये में भुगतान जैसी शर्तों को जरूर समझें। आधिकारिक जानकारी के लिए बैंक और सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध मौजूदा नियमों को प्राथमिकता दें।
