
नई दिल्ली, 27 मार्च। दिल्ली की एक अदालत ने म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार सात विदेशी नागरिकों से जुड़े मामले की सुनवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मुख्यालय में कराने की अनुमति दे दी है।
सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पटियाला हाउस कोर्ट ने एनआईए की याचिका को मंजूरी देते हुए निर्देश दिया कि मामले की आगे की सभी सुनवाई अब एनआईए मुख्यालय में की जाए।
एनआईए की याचिका हुई स्वीकार
दरअसल, छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को उनकी 11 दिन की हिरासत पूरी होने के बाद एनआईए अदालत में पेश किया जाना था।
हालांकि एनआईए ने अदालत में आवेदन देकर मांग की कि सुरक्षा कारणों से आगे की सुनवाई अदालत परिसर के बजाय एजेंसी के मुख्यालय में कराई जाए।
अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि आरोपियों को नामित न्यायाधीश के समक्ष एनआईए मुख्यालय में पेश किया जाए, जहां आगे की कार्यवाही होगी।
पर्यटक वीजा पर भारत आए थे आरोपी
एनआईए के मुताबिक यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसके राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हो सकते हैं।
जांच के अनुसार सातों आरोपी पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और बाद में मिजोरम पहुंचकर अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश कर गए।
हथियार और ड्रोन प्रशिक्षण देने का आरोप
एजेंसी का आरोप है कि आरोपी म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों के संपर्क में थे और वहां हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दे रहे थे।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने यूरोप से ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग उपकरणों की खरीद और आवाजाही में मदद की, जिनका इस्तेमाल सीमा पार प्रशिक्षण में किया गया।
सात विदेशी नागरिक आरोपी
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में यूक्रेन के नागरिक पेट्रो हुब्रा, तारास स्लिविएक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की शामिल हैं।
वहीं अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक भी इस मामले में आरोपी है।
वैनडाइक को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और बाकी तीन को लखनऊ से पकड़ा गया।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच जारी
यह मामला एनआईए की उस बड़ी जांच का हिस्सा है, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सक्रिय विदेशी भाड़े के सैनिकों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क 2024 से सक्रिय था और म्यांमार में उग्रवादी तत्वों को प्रशिक्षण दे रहा था।
एनआईए के अनुसार एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की जांच जारी रखे हुए है और मामले से जुड़े सभी कड़ियों का पता लगाने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है।
