क्या होते हैं अजूबे? दुनिया में सिर्फ सात ही क्यों माने जाते हैं, जानिए पूरी कहानी

जब भी दुनिया के सबसे अद्भुत और शानदार निर्माणों की बात होती है, तो सबसे पहले “दुनिया के सात अजूबे” का नाम सामने आता है। बचपन से ही हम इन सात अजूबों के बारे में पढ़ते और सुनते आए हैं, लेकिन अक्सर मन में एक सवाल जरूर उठता है कि आखिर दुनिया में सिर्फ सात ही अजूबे क्यों हैं? क्या दुनिया में इतने शानदार निर्माण होने के बावजूद 8वां अजूबा नहीं बन सकता?
आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब आसान भाषा में।
आखिर अजूबा किसे कहा जाता है?
अजूबा (Wonder) उस निर्माण, स्मारक या प्राकृतिक स्थल को कहा जाता है, जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व, इंजीनियरिंग कौशल, सुंदरता या अनोखेपन के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो। ऐसी जगहों को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं और यही कारण है कि इन्हें “अजूबा” कहा जाता है। हर साल करोड़ों पर्यटक इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखने के लिए अलग-अलग देशों की यात्रा करते हैं।
दुनिया में सिर्फ सात अजूबे ही क्यों हैं?
इस सवाल का जवाब इतिहास में छिपा हुआ है।
करीब 2,200 साल पहले प्राचीन यूनान (Greece) के विद्वानों और यात्रियों ने उस समय की सबसे अद्भुत इमारतों और स्मारकों की एक सूची तैयार की थी। उन्होंने सात स्थानों को चुना क्योंकि उस समय संख्या 7 को पूर्णता, शुभता और आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता था। यही वजह है कि सूची में सात निर्माणों को शामिल किया गया और धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में “Seven Wonders of the World” के नाम से प्रसिद्ध हो गई।
पुराने सात अजूबों का क्या हुआ?
प्राचीन दुनिया के सात अजूबों में से अधिकांश समय, युद्ध, भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं के कारण नष्ट हो गए। आज उन सात अजूबों में से केवल मिस्र का गीजा का महान पिरामिड (Great Pyramid of Giza) ही सुरक्षित बचा हुआ है।
नए सात अजूबे कैसे चुने गए?
समय बदलने के साथ दुनिया में कई नई ऐतिहासिक और अद्भुत इमारतें सामने आईं।
इसी वजह से वर्ष 2007 में स्विट्जरलैंड स्थित New7Wonders Foundation ने दुनिया भर के लोगों से ऑनलाइन और फोन के माध्यम से मतदान कराया। करोड़ों वोटों के आधार पर आधुनिक दुनिया के नए सात अजूबों का चयन किया गया।
क्या 8वां अजूबा नहीं बन सकता?
इसका सीधा जवाब है—बन सकता है।
असल में ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय नियम नहीं है कि दुनिया में केवल सात ही अजूबे हो सकते हैं।
“सात अजूबे” केवल एक ऐतिहासिक और प्रसिद्ध सूची का नाम है। यदि भविष्य में कोई ऐसा निर्माण या प्राकृतिक स्थल बनता है जो पूरी दुनिया को हैरान कर दे, तो लोग उसे सम्मान के रूप में “दुनिया का 8वां अजूबा” कह सकते हैं। हालांकि, यह केवल एक लोकप्रिय उपाधि होती है। आधिकारिक तौर पर दुनिया के सात अजूबों की सूची वही मानी जाती है जिसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है।
कई जगहों को कहा जाता है ‘8वां अजूबा’
दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जिन्हें लोग अनौपचारिक रूप से “8वां अजूबा” कहते हैं।
उदाहरण के लिए—
- दुबई का पाम जुमेराह
- बुर्ज खलीफा
- सिगिरिया (श्रीलंका)
- अंकोर वाट (कंबोडिया)
- सालार डी उयूनी (बोलीविया)
हालांकि इनमें से किसी को भी आधिकारिक तौर पर आठवां अजूबा घोषित नहीं किया गया है।
वर्तमान में दुनिया के सात अजूबे
आज दुनिया के नए सात अजूबों की सूची में ये स्मारक शामिल हैं—
- ताजमहल (भारत)
- चीन की महान दीवार (चीन)
- माचू पिचू (पेरू)
- पेट्रा (जॉर्डन)
- कोलोसियम (इटली)
- चिचेन इत्जा (मैक्सिको)
- क्राइस्ट द रिडीमर (ब्राज़ील)
इन सभी स्मारकों को उनकी ऐतिहासिक विरासत, अद्भुत वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व के कारण पूरी दुनिया में विशेष पहचान मिली हुई है।
क्या भविष्य में सूची बदल सकती है?
इतिहासकारों के अनुसार, नई सूची बनाना संभव है, लेकिन फिलहाल दुनिया के सात अजूबों की यही सूची सबसे अधिक मान्यता प्राप्त है।भविष्य में यदि कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था नया वैश्विक मतदान कराए तो नई सूची बन सकती है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है।
