PM मोदी की सोना न खरीदने की अपील से ज्वेलर्स में चिंता! 🪙 शादी सीजन से पहले बिक्री घटने का डर, छोटे सुनारों और कारीगरों पर रोजगार का संकट मंडराने की आशंका।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने से बचने की दूसरी अपील के बाद ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारियों, छोटे सुनारों और कारीगरों की चिंता बढ़ गई है। कारोबारियों को डर है कि सोने की खरीदारी को लेकर ग्राहकों की हिचकिचाहट बढ़ने से आने वाले त्योहारी और शादी सीजन में ज्वेलरी की मांग प्रभावित हो सकती है।
पीएम मोदी की अपील के बाद क्यों बढ़ी चिंता….?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक रैली के दौरान लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। अब दोबारा गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील किए जाने के बाद ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों के बीच चिंता का माहौल है। दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के मुताबिक, ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े कई कारोबारियों ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता संगठन के सामने रखी है।
800 टन से घटकर 500 टन तक आ सकती है खपत….
CTI का अनुमान है कि भारत में सोने की सालाना खपत करीब 700 से 800 टन रहती है। संगठन को आशंका है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह खपत घटकर लगभग 500 टन तक पहुंच सकती है। कारोबारियों का कहना है कि सोने की खरीदारी को लेकर सार्वजनिक अपील और बाजार में कीमतों को लेकर अनिश्चितता का असर ग्राहकों के फैसले पर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव ज्वेलरी की बिक्री पर पड़ने की आशंका है।
शादी सीजन से पहले ज्वेलर्स की बढ़ी परेशानी….
अक्टूबर-नवंबर में शादी सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में कई परिवार पहले से ही शादी और त्योहारों के लिए ज्वेलरी खरीदने की तैयारी करते हैं। कारोबारियों को डर है कि सोने की कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण लोग खरीदारी टाल सकते हैं। अगर शादी और त्योहारी सीजन में ग्राहकों की संख्या कम होती है तो ज्वेलरी कारोबार पर दबाव और बढ़ सकता है।
छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों पर ज्यादा असर….
ज्वेलरी बाजार में बिक्री कम होने का असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता। छोटे ज्वेलर्स, सुनार और गहने बनाने वाले कारीगर भी इससे प्रभावित होते हैं। कारोबारियों का कहना है कि लंबे समय तक बिक्री कमजोर रहने पर छोटे कारोबारियों के लिए कर्मचारियों का वेतन देना मुश्किल हो सकता है और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। उनके अनुसार, मई में पहली अपील के बाद कुछ छोटे मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स के कारोबार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।
ग्राहकों का इंतजार कर रहे कई रिटेलर्स….
कुछ कारोबारियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही काफी कम हुई है। लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें नीचे आ सकती हैं। इसी उम्मीद में कुछ ग्राहक छोटी ज्वेलरी खरीदारी भी टाल रहे हैं। बिक्री कमजोर होने के कारण कुछ रिटेल विक्रेताओं ने नया स्टॉक लेने और नए ऑर्डर देने से भी दूरी बनाई है। इससे बाजार में कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है।
कारीगरों के सामने रोजगार का संकट….
सोने की बिक्री और ज्वेलरी निर्माण का काम कम होने से कारीगरों की रोजमर्रा की कमाई पर भी असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि पहली अपील के बाद कुछ कारीगरों को वैकल्पिक काम तलाशने की स्थिति का सामना करना पड़ा। अब दूसरी अपील के बाद उन्हें आशंका है कि अगर सोने की मांग लंबे समय तक कमजोर रही तो रोजगार का दबाव और बढ़ सकता है।
बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटे कारोबारियों पर ज्यादा दबाव….
ज्वेलर्स का तर्क है कि सोने की बिक्री में गिरावट का असर छोटे दुकानदारों और कारीगरों पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ता है। बड़ी कॉरपोरेट ज्वेलरी कंपनियों के पास कारोबार संभालने के लिए ज्यादा संसाधन हैं, जबकि छोटे कारोबारी रोजाना की बिक्री पर अधिक निर्भर रहते हैं। कारोबारियों ने यह भी तर्क दिया है कि सोना भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि एक तरह की संपत्ति भी माना जाता है।
भारतीय संस्कृति और शादियों में सोने की बड़ी भूमिका….
भारत में सोने का इस्तेमाल सिर्फ निवेश के तौर पर नहीं बल्कि पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। खासकर शादी-ब्याह में सोने के आभूषणों की खरीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है। CTI से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, सोने की खरीदारी को लेकर मौजूदा स्थिति ज्वेलरी कारोबार के साथ उन परिवारों के लिए भी चुनौती बन सकती है जो शादी के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।
ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी असर की आशंका….
CTI ने यह भी आशंका जताई है कि सोने की मांग में संभावित गिरावट का असर शेयर बाजार में सूचीबद्ध प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ सकता है। संगठन ने Titan, Senco Gold और Kalyan Jewellers जैसी कंपनियों के शेयरों पर नकारात्मक प्रभाव की संभावना जताई है। फिलहाल ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों की सबसे बड़ी चिंता आगामी त्योहारी और शादी सीजन को लेकर है। कारोबारियों का कहना है कि ग्राहकों की कम आवाजाही और नए स्टॉक से दूरी जैसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।
