Re-NEET 2026 को लेकर नया विवाद, कलावा और बुर्के के नियमों पर उठे सवाल, NTA से जांच की मांग।

नई दिल्ली: NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। परीक्षा के दौरान धार्मिक प्रतीकों और परिधानों को लेकर कथित तौर पर अलग-अलग नियम लागू किए जाने के आरोपों ने बहस छेड़ दी है। इस मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े प्रचारक और सामाजिक कार्यकर्ता विनोद बंसल ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जांच की मांग की है।
विनोद बंसल का आरोप है कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर हिंदू छात्रों को हाथ में बंधा कलावा (रक्षासूत्र) उतारने के लिए कहा गया, जबकि दूसरी ओर कुछ अन्य धार्मिक परिधानों को अनुमति दी गई। उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए समान नियम लागू करने की मांग की है।
क्या हैं आरोप?
विनोद बंसल ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान के माध्यम से दावा किया कि री-NEET परीक्षा के दौरान कुछ छात्रों के साथ धार्मिक पहचान के आधार पर अलग व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा और परीक्षा नियमों के तहत किसी धार्मिक प्रतीक पर रोक लगाई जाती है, तो वही नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू छात्रों को कलावा पहनने से रोका गया, जबकि बुर्का पहनकर परीक्षा देने की अनुमति दी गई। बंसल ने कहा कि इस तरह का अलग-अलग व्यवहार सांप्रदायिक भेदभाव के समान माना जा सकता है।
NTA से की जांच की मांग
विनोद बंसल ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने और परीक्षा केंद्रों पर लागू ड्रेस कोड व सुरक्षा नियमों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कहीं नियमों का गलत तरीके से पालन हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में होने वाली राष्ट्रीय परीक्षाओं में सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने विनोद बंसल की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। वहीं कुछ अन्य लोगों का कहना है कि धार्मिक परिधानों और प्रतीकों को लेकर पहले से निर्धारित दिशानिर्देश मौजूद हैं और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार किया जाना चाहिए।
परीक्षा नियमों पर फिर उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सुरक्षा जांच और ड्रेस कोड को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशानिर्देश और उनका एक समान पालन बेहद जरूरी होता है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि किसी परीक्षा केंद्र पर नियमों की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की गई है, तो इससे छात्रों में भ्रम और असंतोष पैदा हो सकता है।
