पाकिस्तान की राजनीति में फिर मचा घमासान! पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए यह पद पर आखिरी साल साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश में वास्तविक ताकत प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि सैन्य नेतृत्व के हाथों में है।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सत्ता और प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है। देश के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए यह पद पर आखिरी साल साबित हो सकता है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय के बजाय सैन्य नेतृत्व के हाथों में केंद्रित होती जा रही है।
मिफ्ताह इस्माइल का यह बयान ऐसे समय आया है जब शहबाज शरीफ सरकार हालिया कूटनीतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को अपनी बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रही है। इस बयान ने पाकिस्तान के सत्ता समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
पॉडकास्ट में किया बड़ा दावा
एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान मिफ्ताह इस्माइल ने कहा कि पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में सत्ता संतुलन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इस्माइल ने कहा कि देश में महत्वपूर्ण फैसलों और राजनीतिक प्रभाव के केंद्र को लेकर जनता और राजनीतिक वर्ग के बीच अलग धारणा बनती जा रही है।
मोहसिन नकवी की पोस्ट का दिया उदाहरण
अपने दावे के समर्थन में मिफ्ताह इस्माइल ने पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की एक सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद नकवी ने फील्ड मार्शल जनरल असीम मुनीर को बधाई दी, लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का उल्लेख नहीं किया।
इस्माइल के अनुसार, यह घटना इस बात का संकेत मानी जा सकती है कि सत्ता के वास्तविक केंद्र को लेकर सरकार के भीतर भी एक अलग धारणा मौजूद है।
सैन्य नेतृत्व की भूमिका पर उठाए सवाल
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। उनका मानना है कि कई अहम मामलों में सैन्य नेतृत्व का प्रभाव राजनीतिक नेतृत्व से अधिक दिखाई देता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में जाएंगी, यह कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगा।
क्या बदलेंगे पाकिस्तान के राजनीतिक समीकरण?
फिलहाल प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि मिफ्ताह इस्माइल की टिप्पणी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान में आने वाले समय में राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन को लेकर नए समीकरण बन सकते हैं।
आने वाले महीनों में देश की राजनीतिक गतिविधियां और सरकार के फैसले इस बहस की दिशा तय कर सकते हैं।
