महंगाई से बदली पाकिस्तान की थाली! दूध, मीट, गेहूं और चावल की खपत में कमी, खाने की कमी से जूझ रहे परिवारों की संख्या भी बढ़ी.....

पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों और महंगाई से जूझ रहा है. अब इसका असर लोगों की खाने की आदतों पर भी दिखाई देने लगा है. एक रिपोर्ट में पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में कई जरूरी खाद्य पदार्थों की घरेलू खपत में कमी आई है. बढ़ती कीमतों के बीच परिवार अपने सीमित बजट को संभालने के लिए जरूरी और गैर-जरूरी खर्चों में बदलाव कर रहे हैं. इसका सबसे ज्यादा असर उन खाद्य पदार्थों पर दिखाई दे रहा है, जिन्हें खरीदना अपेक्षाकृत महंगा पड़ता है.
दूध और मीट की खपत में कटौती….
महंगाई का असर लोगों के खाने में शामिल प्रोटीन और दूसरी जरूरी चीजों पर भी पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार पहले की तुलना में दूध और मीट जैसी चीजों की खरीद कम कर रहे हैं. मीट और दूध की कीमतें बढ़ने के कारण कम आय वाले परिवारों के लिए इन्हें नियमित रूप से खरीदना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में कई घरों में इनकी मात्रा घटाने या सस्ते विकल्पों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है.
गेहूं और चावल का इस्तेमाल भी घटा….
पाकिस्तान में गेहूं रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है. इसके बावजूद आंकड़ों में गेहूं की घरेलू खपत में कमी का संकेत मिला है. इसी तरह चावल और चाय के इस्तेमाल में भी गिरावट बताई गई है. यह बदलाव इस बात की ओर इशारा करता है कि महंगाई अब केवल लोगों की बचत या दूसरे खर्चों को प्रभावित नहीं कर रही, बल्कि परिवारों के भोजन से जुड़े फैसलों को भी बदल रही है.
खाने की कमी झेलने वाले परिवार बढ़े….
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2018-19 में करीब 15.92 फीसदी परिवारों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं हो पा रहा था. 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 24.35 फीसदी हो गया. इसी अवधि में बहुत ज्यादा खाद्य कमी का सामना करने वाले परिवारों का आंकड़ा भी 2.37 फीसदी से बढ़कर 5.04 फीसदी हो गया. इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि हर प्रभावित परिवार पूरी तरह भूखा है या कुपोषण का शिकार है. ये आंकड़े मुख्य रूप से परिवारों की पर्याप्त भोजन तक पहुंच में आई मुश्किलों को दर्शाते हैं.
घी की खपत में आई बढ़ोतरी….
जहां गेहूं, चावल, दूध और मीट जैसी कई खाद्य चीजों की खपत कम होने की बात सामने आई है, वहीं घी का इस्तेमाल बढ़ा है. घरों में घी की मासिक खपत करीब 690 ग्राम से बढ़कर 1.25 किलोग्राम से ज्यादा हो गई. यह लगभग 81 फीसदी की बढ़ोतरी है. सिर्फ इस आंकड़े के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि घी की खपत बढ़ने की वजह महंगाई ही है. इसके पीछे लोगों की आय, कीमतों में बदलाव, खाने की आदतों और अन्य आर्थिक कारणों की भी भूमिका हो सकती है.
गांवों के साथ शहर भी प्रभावित…..
खाद्य संकट और बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है. शहरों में रहने वाले परिवार भी बढ़ते घरेलू खर्च से प्रभावित हो रहे हैं. महंगे खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने पर परिवार अक्सर कम मात्रा में सामान खरीदते हैं या अपेक्षाकृत सस्ते विकल्पों की तरफ रुख करते हैं. इससे भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर भी असर पड़ सकता है.
महंगाई से आगे की चुनौती….
पाकिस्तान के सामने चुनौती केवल बाजार में खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की नहीं है. बड़ी चुनौती यह भी है कि आम परिवार इन जरूरी चीजों को अपनी आय के भीतर खरीद सकें. अगर खाद्य कीमतें और घरेलू खर्च बढ़ते रहते हैं, तो कम आय वाले परिवारों पर दबाव और बढ़ सकता है. ऐसे में पर्याप्त, पौष्टिक और किफायती भोजन तक लोगों की पहुंच बनाए रखना पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक चुनौती बनी हुई है.
