कई छात्रों को डर रहता है कि अगर परीक्षा केंद्र पर फिंगरप्रिंट मैच नहीं हुआ तो क्या होगा? NTA ने इसके लिए बैकअप प्लान तैयार किया है। बायोमेट्रिक फेल होने का मतलब यह नहीं कि आप परीक्षा नहीं दे पाएंगे।

नई दिल्ली: NEET UG री-एग्जाम को लेकर छात्रों के मन में कई तरह की चिंताएं हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को लेकर है। कई अभ्यर्थियों को डर है कि यदि परीक्षा केंद्र पर उनका फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक सत्यापन फेल हो गया तो क्या उन्हें परीक्षा देने से रोका जाएगा?
इस बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में उम्मीदवारों को घबराने की जरूरत नहीं है। एजेंसी के पास बायोमेट्रिक फेल होने की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है।
क्या होता है बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन?
NEET परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है। इसमें आमतौर पर फिंगरप्रिंट स्कैन और फोटो मिलान की प्रक्रिया शामिल होती है।
इसका उद्देश्य परीक्षा में किसी प्रकार की फर्जीवाड़े या प्रतिरूपण (Impersonation) को रोकना होता है।
बायोमेट्रिक फेल होने पर क्या होगा?
यदि किसी तकनीकी कारण, फिंगरप्रिंट की समस्या या मशीन की खराबी के चलते बायोमेट्रिक सत्यापन सफल नहीं हो पाता है, तो उम्मीदवार को तुरंत परीक्षा से बाहर नहीं किया जाएगा।
ऐसी स्थिति में परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारी वैकल्पिक पहचान प्रक्रिया अपनाएंगे। इसमें दस्तावेजों की जांच, फोटो मिलान, हस्ताक्षर सत्यापन और अन्य पहचान संबंधी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।
NTA का बैकअप प्लान
NTA के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी उम्मीदवार का बायोमेट्रिक सत्यापन असफल होने पर मैनुअल वेरिफिकेशन की व्यवस्था की जाती है।
इसके तहत:
- एडमिट कार्ड की जांच की जाती है।
- वैध फोटो पहचान पत्र का मिलान किया जाता है।
- उम्मीदवार की फोटो और हस्ताक्षर का सत्यापन किया जाता है।
- आवश्यक होने पर अतिरिक्त दस्तावेज भी देखे जा सकते हैं।
- परीक्षा केंद्र अधीक्षक की अनुमति के बाद अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है।
छात्रों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि उम्मीदवार परीक्षा वाले दिन सभी आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर जाएं।
साथ रखें:
✅ NEET एडमिट कार्ड
✅ वैध फोटो पहचान पत्र
✅ पासपोर्ट साइज फोटो (यदि निर्देशित हो)
✅ NTA द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज
इसके अलावा परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचना भी जरूरी है ताकि किसी भी सत्यापन प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
घबराने के बजाय नियमों का पालन करें
NTA का कहना है कि बायोमेट्रिक सिस्टम सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक सत्यापन व्यवस्था भी बनाई गई है। इसलिए यदि किसी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन पहली बार में सफल नहीं होता, तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल NTA द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करें।
