बिहार बाढ़ पर तेजस्वी यादव का PM मोदी को पत्र!

बिहार इन दिनों भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। कई इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित है और बाढ़ प्रभावित लोगों के सामने राहत, भोजन, पीने के पानी और आवागमन जैसी कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार, 7 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में बिहार की बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने और राज्य के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष बाढ़ राहत पैकेज देने समेत कुल सात मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए बिहार को तत्काल अतिरिक्त संसाधनों और आर्थिक मदद की जरूरत है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत और बचाव सामग्री पहुंचाई जा सके।
तेजस्वी यादव ने क्यों लिखा PM मोदी को पत्र?
मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव ने पत्र लिखने की वजह भी बताई। उन्होंने दावा किया कि बिहार सरकार की वित्तीय स्थिति बेहद खराब है और सरकार ने बाढ़ से ठीक पहले सामान्य योजनाओं के लिए आकस्मिक निधि से बड़ी राशि निकाली थी।
तेजस्वी यादव के मुताबिक, जून महीने में बिहार सरकार ने पेंशन जैसी सामान्य योजनाओं के भुगतान के लिए आकस्मिक फंड से 4,000 करोड़ रुपये निकाले थे। उनका कहना है कि अब बाढ़ के दौरान राज्य के पास पर्याप्त संसाधनों की कमी का असर बाढ़ पीड़ितों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, यह आरोप तेजस्वी यादव की ओर से लगाया गया है और इस पर राज्य सरकार का पक्ष अलग हो सकता है। ऐसे में आकस्मिक निधि से राशि निकाले जाने और उसके इस्तेमाल से जुड़े दावों को आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग
तेजस्वी यादव की पहली और सबसे प्रमुख मांग है कि बिहार की मौजूदा बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए। उनका तर्क है कि बाढ़ का असर व्यापक है और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए राज्य स्तर के संसाधनों के साथ केंद्र सरकार की अतिरिक्त सहायता भी जरूरी है।
अगर केंद्र सरकार की ओर से बड़े स्तर पर वित्तीय और लॉजिस्टिक सहायता मिलती है तो प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान को तेज किया जा सकता है।
5 हजार करोड़ के विशेष पैकेज की मांग
दूसरी मांग के तौर पर तेजस्वी यादव ने बिहार के लिए 5,000 करोड़ रुपये की तत्काल वित्तीय सहायता मांगी है। उनका कहना है कि इस राशि का इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए किया जा सकता है। बाढ़ के कारण जिन परिवारों का घर, रोजगार या आजीविका प्रभावित हुई है, उन्हें भी आर्थिक सहायता की जरूरत है।
नाव और बोट की तत्काल व्यवस्था
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी समस्या कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट जाना होता है। तेजस्वी यादव ने ऐसे क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त नाव, बोट और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।
उनके मुताबिक, जिन इलाकों में सड़क के रास्ते राहत सामग्री नहीं पहुंचाई जा सकती, वहां नाव और अन्य जल परिवहन साधनों के जरिए लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है।
सेना और वायुसेना की मदद की मांग
तेजस्वी यादव ने राहत एवं बचाव अभियान में सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद सुनिश्चित करने की मांग भी की है। खासकर उन इलाकों में जहां बाढ़ का पानी बेहद ज्यादा है और लोग सड़क मार्ग से सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां हवाई और सैन्य संसाधन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ भोजन, दवा और अन्य जरूरी सामान भी पहुंचाया जा सकता है।
भोजन, पानी और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की मांग
बाढ़ के बाद सबसे बड़ा खतरा सिर्फ पानी नहीं होता, बल्कि साफ पेयजल, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी को देखते हुए तेजस्वी यादव ने प्रभावित इलाकों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां, पशुचारा और अस्थायी आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ-साथ पशुधन की सुरक्षा और जरूरतों को भी राहत व्यवस्था में शामिल करने की बात कही है।
किसानों और मजदूरों के लिए आर्थिक सहायता
बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती और पशुपालन की बड़ी भूमिका है। बाढ़ से खेतों, फसलों और पशुओं को नुकसान होने की स्थिति में ग्रामीण परिवारों की आय पर सीधा असर पड़ सकता है। तेजस्वी यादव ने किसानों, मजदूरों, पशुपालकों और प्रभावित परिवारों के लिए विशेष आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
इसका उद्देश्य बाढ़ के कारण आजीविका गंवाने वाले परिवारों को तत्काल राहत देने के साथ उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करना है।
आकस्मिक निधि के इस्तेमाल की स्वतंत्र समीक्षा की मांग
तेजस्वी यादव की सातवीं मांग वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ी है। उन्होंने बिहार की वित्तीय और आपदा प्रबंधन तैयारियों के साथ-साथ राज्य की आकस्मिक निधि के उपयोग और लेनदेन की स्वतंत्र समीक्षा या CAG परीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि आपदा के समय राज्य के पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों और उनके इस्तेमाल की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
अब केंद्र के जवाब पर नजर
तेजस्वी यादव के पत्र के बाद अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार बिहार की इन मांगों पर क्या कदम उठाती है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और 5,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग पर केंद्र का रुख भी राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत और बचाव अभियान सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में तेजस्वी यादव की सात मांगों ने बिहार की बाढ़ को लेकर राज्य सरकार की तैयारियों, वित्तीय स्थिति और केंद्र से मिलने वाली सहायता पर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।
