सिंधी समाज का दावा- चंपत राय को दी थी 200 किलो चांदी, राम मंदिर के लिए दी गई शिलाओं की रसीद नहीं मिली

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर उठे सवालों के बीच अब सिंधी समाज ने एक नया दावा किया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को करीब 200 किलो चांदी सौंपी थी, जिसका उपयोग राम मंदिर परिसर में विशेष शिलाएं बनाने के लिए किया जाना था। हालांकि, समाज का आरोप है कि उन्हें आज तक इस चांदी की कोई आधिकारिक रसीद नहीं मिली और न ही इसके उपयोग को लेकर स्पष्ट जानकारी दी गई है।
सिंधी समाज के पदाधिकारियों ने यह भी दावा किया कि चांदी के साथ मंदिर परिसर के लिए तैयार कराई गई एक विशेष धार्मिक संरचना ‘काकभुशुंडि’ का भी अब कोई पता नहीं चल रहा है। इस मामले ने समाज के लोगों के बीच चिंता और नाराजगी बढ़ा दी है।
क्या है पूरा मामला?
सिंधी समाज के अनुसार, राम मंदिर निर्माण अभियान के दौरान देशभर से श्रद्धालुओं और संगठनों ने उदारतापूर्वक दान दिया था। इसी क्रम में समाज की ओर से लगभग 200 किलो चांदी एकत्र कर ट्रस्ट को सौंपी गई थी। बताया गया था कि इस चांदी का उपयोग मंदिर परिसर में धार्मिक महत्व की शिलाएं और अन्य संरचनाएं तैयार करने में किया जाएगा।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि दान सौंपे जाने के बाद कई बार ट्रस्ट से संपर्क किया गया, लेकिन उन्हें न तो कोई विस्तृत दस्तावेज उपलब्ध कराया गया और न ही यह बताया गया कि चांदी का इस्तेमाल कहां और किस रूप में हुआ।
रसीद नहीं मिलने पर उठे सवाल
दानदाताओं का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में चांदी देने के बावजूद उन्हें आज तक आधिकारिक रसीद नहीं मिली। उनका आरोप है कि कई बार लिखित और मौखिक रूप से जानकारी मांगी गई, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
समाज के सदस्यों का कहना है कि वे राम मंदिर निर्माण के लिए किए गए अपने योगदान का सम्मान चाहते हैं और केवल पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
‘काकभुशुंडि’ को लेकर भी सवाल
विवाद का दूसरा पहलू ‘काकभुशुंडि’ नामक धार्मिक प्रतीक या संरचना को लेकर है। समाज का दावा है कि इसे भी मंदिर परिसर में स्थापित किए जाने की योजना थी, लेकिन अब इसकी स्थिति को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे दानदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार किया जा रहा है। यदि ट्रस्ट की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है तो इससे स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
पारदर्शिता की मांग तेज
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग लगातार उठती रही है। सिंधी समाज का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि दान की गई सामग्री के संबंध में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करना है।
(नोट: यह मामला दानदाताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित है। संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।)
