🚨 पैक्ड फूड खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से Warning Label को लेकर 13 सवाल पूछे। ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले फूड पर जल्द दिख सकता है लाल चेतावनी निशान। 🥫⚠️

पैक्ड फूड में मौजूद ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल लागू करने को लेकर कई सवाल पूछे हैं। अदालत ने साफ कहा कि बच्चों और आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे को राष्ट्रीय हित के महत्वपूर्ण विषय के तौर पर देखा जाना चाहिए। मामला पैकेज के सामने चेतावनी देने वाले Front of Pack Warning Label (FOPL) से जुड़ा है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को यह बताना है कि किसी खाद्य उत्पाद में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक है या नहीं।
क्या है Warning Label का प्रस्ताव…..?
कोर्ट की सख्ती के बाद FSSAI ने पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर लाल रंग का छह कोण वाला (Hexagonal) Warning Label लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह चेतावनी उन उत्पादों पर लगाए जाने का प्रस्ताव है, जिनमें निर्धारित मानकों से अधिक चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट मौजूद हो। इससे ग्राहक पैकेट खरीदते समय सामने से ही समझ सकेंगे कि किसी उत्पाद में इन पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है। FSSAI ने इस व्यवस्था को दो चरणों में लागू करने की बात कही थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया और नियम को एक ही चरण में लागू करने की संभावना पर विचार करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पूछे 13 सवाल……
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इस मामले में FSSAI से कुल 13 सवालों के जवाब मांगे हैं। इनका जवाब देने के लिए 28 सितंबर 2026 की तारीख तय की गई है। कोर्ट के सवालों में प्रमुख रूप से यह जानने की कोशिश की गई है कि Warning Label कब तक लागू होगा और किसी खाद्य पदार्थ को ‘High Sugar’, ‘High Salt’ या ‘High Fat’ मानने के लिए वैज्ञानिक आधार क्या है। अदालत ने यह भी पूछा कि इन सीमाओं का निर्धारण 100 ग्राम या 100 मिलीलीटर उत्पाद के आधार पर होगा या फिर एक सर्विंग के हिसाब से किया जाएगा।
बच्चों को जंक फूड से कैसे बचाया जाएगा……?
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में जागरूक करने को लेकर भी सवाल किया है। कोर्ट जानना चाहता है कि प्रस्तावित नियमों में बच्चों और अन्य उपभोक्ताओं को ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूक करने की क्या व्यवस्था होगी। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पैकेजिंग पर आकर्षक विज्ञापन और दावों के बीच ग्राहक के लिए किसी उत्पाद की वास्तविक पोषण संबंधी जानकारी समझना मुश्किल हो सकता है।
लाल रंग के Warning Label पर भी सवाल…..
सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्तावित लाल रंग के लेबल को लेकर भी एक अहम सवाल उठाया है। भारत में लाल रंग का इस्तेमाल मांसाहारी खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए भी किया जाता है। ऐसे में अदालत ने पूछा कि क्या लाल रंग के Warning Label से उपभोक्ताओं के बीच किसी तरह का भ्रम पैदा हो सकता है।
Added Sugar और Added Fat पर भी सवाल……
कोर्ट ने यह भी पूछा कि चेतावनी तय करने के लिए किसी उत्पाद में मौजूद कुल चीनी और वसा को आधार बनाया जाए या केवल Added Sugar और Added Fat को। इसके अलावा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की पहचान के लिए स्पष्ट नियमों को लेकर भी FSSAI से जवाब मांगा गया है। शहद, घी, तेल और गुड़ जैसे एकल सामग्री वाले उत्पादों को प्रस्तावित नियमों से छूट देने के आधार पर भी अदालत ने सवाल किया है।
कंपनियों पर कार्रवाई का क्या प्रावधान होगा…..?
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि अगर कोई कंपनी Warning Label से जुड़े नियमों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ FSSAI की ओर से क्या कार्रवाई और सजा का प्रावधान होगा। इसके साथ ही अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि भारत में इस तरह के Warning Label लागू करने में अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में देरी क्यों हो रही है।
28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई……
अब FSSAI को सुप्रीम कोर्ट के 13 सवालों का जवाब देना है। अदालत ने इसके लिए 28 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। अगर प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो पैकेज्ड फूड खरीदने वाले ग्राहकों को पैकेट के सामने ही यह समझने में आसानी हो सकती है कि किसी उत्पाद में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा है या नहीं। फिलहाल Warning Label को लेकर अंतिम तस्वीर सुप्रीम कोर्ट में FSSAI के जवाब और आगे होने वाली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
नोट: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और कोर्ट में उठाए गए सवालों के आधार पर तैयार किया गया है। Warning Label से जुड़े नियमों में अंतिम बदलाव संबंधित सरकारी अधिसूचना और सुप्रीम कोर्ट के आगे के निर्देशों के अनुसार होंगे।
