दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल किसने की थी? सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच जानिए 16 साल तक चले इरोम शर्मिला के ऐतिहासिक आंदोलन की पूरी कहानी और आखिर वह इतने लंबे समय तक कैसे जीवित रहीं।

देश में इन दिनों सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल चर्चा का विषय बनी हुई है। दुनिया भर में भूख हड़ताल का इस्तेमाल लंबे समय से अहिंसक विरोध के एक ताकतवर तरीके के तौर पर किया जाता रहा है. भारत की आजादी की लड़ाई से लेकर आज के दौर के राजनीतिक अभियानों तक कई कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग की तरफ ध्यान खींचने के लिए भूख हड़ताल का रास्ता चुना. जंतर मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन और कई दिनों की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ चुकी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि सबसे लंबी भूख हड़ताल का वर्ल्ड रिकॉर्ड किसके नाम है.
यदि लंबे समय तक चले भूख हड़ताल आंदोलनों की बात करें, तो यह रिकॉर्ड भारत की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला के नाम दर्ज है। उन्हें “आयरन लेडी ऑफ मणिपुर” के नाम से भी जाना जाता है।
16 साल तक चली भूख हड़ताल
इरोम शर्मिला ने 2 नवंबर 2000 को अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी और 9 अगस्त 2016 तक इसे जारी रखा। इस तरह उनका आंदोलन लगभग 5,793 दिनों तक चला, जिसे दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़तालों में गिना जाता है।
उनकी यह हड़ताल पूरी तरह अहिंसक विरोध का प्रतीक मानी जाती है और मानवाधिकारों के मुद्दे पर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रही।
क्यों शुरू की थी भूख हड़ताल?
इरोम शर्मिला ने यह आंदोलन मणिपुर के मालोम हत्याकांड के विरोध में शुरू किया था। इस घटना में असम राइफल्स के जवानों पर 10 आम नागरिकों की कथित हत्या का आरोप लगा था।
इस घटना के बाद उन्होंने आर्म्ड फोर्सेस (स्पेशल पावर्स) एक्ट (AFSPA) को हटाने की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना था कि यह कानून सुरक्षा बलों को अत्यधिक शक्तियां देता है, जिससे मानवाधिकारों के उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है।
16 साल तक बिना खाना खाए कैसे रहीं जीवित?
भूख हड़ताल शुरू होने के कुछ समय बाद तत्कालीन कानून के तहत इरोम शर्मिला को आत्महत्या के प्रयास के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
न्यायिक हिरासत के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें जीवित रखने के लिए नासोगैस्ट्रिक ट्यूब के माध्यम से तरल पोषणऔर दवाइयां दीं। यह ट्यूब नाक के रास्ते पेट तक पहुंचाई जाती है, जिससे शरीर को आवश्यक पोषण मिलता रहता है।
इरोम शर्मिला ने अपने आंदोलन के दौरान स्वेच्छा से कभी ठोस भोजन स्वीकार नहीं किया। उनका विरोध पूरी अवधि में इसी प्रकार जारी रहा।
भूख हड़ताल लोकतांत्रिक और अहिंसक विरोध का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। इसका उद्देश्य किसी सामाजिक, राजनीतिक या मानवीय मुद्दे की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित करना होता है।
भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी कई नेताओं ने भूख हड़ताल को विरोध के प्रभावी हथियार के रूप में अपनाया था। आज भी विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
