सितंबर में भी बिजली की मांग क्यों नहीं घट रही? ⚡ गर्मी, कम बारिश और खेती की बढ़ी जरूरत ने बढ़ाया बिजली का दबाव। कई पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक भी कम हुआ।

आमतौर पर सितंबर का महीना आते-आते देश में बिजली की मांग कम होने लगती है। मानसून के कारण तापमान में गिरावट आती है और गर्मी से राहत मिलने लगती है। लेकिन सितंबर 2026 में स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा गर्मी के कारण बिजली की खपत लगातार बनी हुई है।
260 गीगावाट के पार पहुंची पीक डिमांड…..
सितंबर में देश की पीक पावर डिमांड 260 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है। 8 सितंबर को बिजली की मांग 260 GW दर्ज की गई, जबकि इससे एक दिन पहले यह करीब 257 GW थी। पूरे महीने बिजली की मांग 249 GW से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सितंबर में आमतौर पर गर्मी कम होने लगती है, तो इस बार बिजली की मांग इतनी ज्यादा क्यों बनी हुई है ?
ज्यादा गर्मी बनी सबसे बड़ी वजह…..
बिजली की बढ़ती मांग के पीछे सबसे बड़ा कारण मौसम को माना जा रहा है। देश के कई हिस्सों में सितंबर के दौरान भी तापमान सामान्य से ज्यादा बना हुआ है। गर्मी बढ़ने के कारण घरों और दफ्तरों में एसी, कूलर और पंखे लंबे समय तक चल रहे हैं। इससे कूलिंग के लिए बिजली की जरूरत कम नहीं हो रही और कुल बिजली खपत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
कम बारिश ने भी बढ़ाई बिजली की जरूरत…..
इस साल मानसून का पैटर्न भी कई इलाकों में अलग रहा है। कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है। इसका असर बिजली उत्पादन और खपत, दोनों पर पड़ रहा है। बारिश कम होने और जलस्तर घटने से हाइड्रो पावर यानी जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए कोयले और गैस से चलने वाले पावर प्लांट पर ज्यादा निर्भरता बढ़ जाती है।
खेती के लिए भी बढ़ी बिजली की खपत…..
कम बारिश का असर खेती पर भी पड़ा है। जहां बारिश से सिंचाई की जरूरत पूरी नहीं हो पाती, वहां किसान ट्यूबवेल और पानी के पंप का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे बिजली की मांग और बढ़ जाती है। यानी एक तरफ घरों और दफ्तरों में कूलिंग के लिए बिजली की खपत बढ़ी है, तो दूसरी तरफ कम बारिश के कारण खेती में सिंचाई के लिए भी ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ रही है।
कई पावर प्लांट में कम हुआ कोयले का स्टॉक…..
बिजली की बढ़ी हुई मांग का सीधा दबाव थर्मल पावर प्लांट पर पड़ रहा है। इन प्लांट्स को ज्यादा बिजली बनाने के लिए अधिक कोयले की जरूरत होती है, जिससे उनके पास मौजूद कोयले का स्टॉक तेजी से कम हो सकता है। 9 सितंबर तक देश के करीब एक-तिहाई कोयला आधारित पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक कम हो गया था। करीब 59 प्लांट के पास सिर्फ 25 फीसदी स्टॉक बचा था, जो लगभग तीन दिन तक चलने के लिए पर्याप्त बताया गया। सरकार की ओर से कोयले की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि बिजली उत्पादन पर इसका ज्यादा असर न पड़े।
केरल और पंजाब में बिजली संकट…..
बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी का असर कुछ राज्यों में ज्यादा दिखाई दे रहा है। केरल और पंजाब इस समय बिजली संकट से जूझ रहे हैं। इन राज्यों में गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ी है। वहीं उत्पादन में गिरावट आने से लंबे समय तक बिजली कटौती की स्थिति भी देखने को मिल रही है।
आगे क्या हो सकता है…..?
सितंबर में सामान्य तौर पर बिजली की मांग में कमी आने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार ज्यादा तापमान, कम बारिश और खेती में बढ़ी सिंचाई की जरूरत ने तस्वीर बदल दी है। अगर गर्मी और बिजली की मांग इसी तरह बनी रहती है, तो कोयले की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना पावर सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल सरकार की कोशिश बढ़ी हुई मांग के बीच पावर प्लांट्स को पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराने की है।
