FSSAI ने Old Monk, Royal Challenge, Bagpiper और Antiquity Blue के कुछ वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। जानिए किन कारणों से हुई यह कार्रवाई और किन राज्यों में लागू हुआ प्रतिबंध।

देश के शराब बाजार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने Old Monk, Royal Challenge (RC), Bagpiper Deluxe, Antiquity Blue समेत कुछ लोकप्रिय शराब ब्रांड्स के कुछ विशेष वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह कार्रवाई जांच के दौरान कुछ उत्पादों में निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए फ्लेवरिंग तत्वों के कारण की गई है।
महत्वपूर्ण: यह प्रतिबंध पूरे ब्रांड पर नहीं, बल्कि जांच में शामिल कुछ खास वेरिएंट्स और संबंधित उत्पादन/बाजार क्षेत्रों पर लागू बताया गया है।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध..?
FSSAI के अनुसार, जांच में पाया गया कि कुछ शराब उत्पादों में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए Artificial या Nature-Identical Flavouring Substances का इस्तेमाल किया गया था। नियामक का कहना है कि संबंधित उत्पादों में ऐसी फ्लेवरिंग का उपयोग निर्धारित निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं था।
जांच में जिन कंपनियों के कुछ उत्पाद शामिल बताए गए हैं, उनमें:
- यूनाइटेड स्पिरिट्स (Diageo India)
- Inbrew Beverages
- Mohan Rocky Springwater Breweries
शामिल हैं।
किन ब्रांड्स के वेरिएंट्स प्रभावित हुए..?
रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्रवाई जिन लोकप्रिय ब्रांड्स के कुछ वेरिएंट्स पर लागू हुई है, उनमें शामिल हैं:
- Old Monk (कुछ वेरिएंट्स)
- Royal Challenge (RC) Whisky
- Bagpiper Deluxe Whisky
- Antiquity Blue Whisky
- Old Cask Deluxe XXX Rum (कुछ क्षेत्रों में)
हालांकि, सभी राज्यों या सभी बैचों पर प्रतिबंध लागू है या नहीं, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
किन राज्यों में हुई कार्रवाई..?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
- मध्य प्रदेश :- Royal Challenge, Antiquity Blue, Bagpiper Deluxe और Old Cask Deluxe XXX Rum के कुछ संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
- महाराष्ट्र :- Old Monk के कुछ वेरिएंट्स पर कार्रवाई की गई है।
यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में यह कार्रवाई अन्य राज्यों या अतिरिक्त बैचों तक बढ़ाई जाएगी या नहीं।
लैब जांच में क्या सामने आया..?
FSSAI की प्रयोगशाला जांच में पाया गया कि कुछ उत्पादों में शराब के स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए ऐसे फ्लेवरिंग एजेंट इस्तेमाल किए गए, जो भारतीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हैं। नियामक का कहना है कि शराब के निर्माण में प्राकृतिक प्रक्रियाओं और अनुमत सामग्री का पालन किया जाना चाहिए तथा गैर-अनुमोदित फ्लेवरिंग का उपयोग नियमों के खिलाफ है।
भारत का बड़ा शराब बाजार….
भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में शामिल है। यहां घरेलू ब्रांड्स की बड़ी हिस्सेदारी है और लाखों उपभोक्ता इनका उपयोग करते हैं। ऐसे में FSSAI की यह कार्रवाई गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या होगा..?
फिलहाल संबंधित कंपनियों और नियामक की ओर से आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। जांच और नियामकीय समीक्षा के आधार पर आगे अतिरिक्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
नोट: यह कार्रवाई उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार कुछ विशेष वेरिएंट्स और संबंधित मामलों तक सीमित है। उपभोक्ताओं को किसी भी भ्रम की स्थिति में संबंधित राज्य आबकारी विभाग या आधिकारिक नियामकीय सूचना का पालन करना चाहिए।
