
मुंबई, 26 मार्च। भारत में कमर्शियल ड्रोन इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में इस सेक्टर का बाजार आकार 1.88 अरब डॉलर (करीब 17,000 करोड़ रुपए) तक पहुंच चुका है।
रिसर्च फर्म बीटूके एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 से 2029 के बीच भारत का कमर्शियल ड्रोन बाजार लगभग 17.98 प्रतिशत की वार्षिक दर (CAGR) से बढ़ने की संभावना है।
वैश्विक स्तर पर भारत सातवें स्थान पर
रिपोर्ट में बताया गया है कि कमर्शियल ड्रोन इंडस्ट्री में अमेरिका पहले स्थान पर है, जबकि चीन दूसरे नंबर पर है। वहीं भारत फिलहाल सातवें स्थान पर मौजूद है, लेकिन तेजी से आगे बढ़ रहा है।
खेती में ड्रोन से लागत में बड़ी कमी
ड्रोन तकनीक का सबसे ज्यादा फायदा कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एग्रोकेमिकल छिड़काव में ड्रोन के इस्तेमाल से लागत करीब 80 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
एक अध्ययन में 6.4 से 7.1 लाख रुपए कीमत वाले छोटे और मध्यम ड्रोन का विश्लेषण किया गया, जिनकी अधिकतम कार्य अवधि तीन साल मानी गई।
इसके मुकाबले मैनुअल मजदूरी पर सालाना करीब 1.7 लाख रुपए खर्च होता है। हालांकि ड्रोन की शुरुआती लागत ज्यादा होती है, लेकिन उनकी कार्यक्षमता काफी अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार ड्रोन उतने समय में 6 से 6.6 एकड़ जमीन पर काम कर सकते हैं, जितना समय मजदूर केवल एक एकड़ में लगाते हैं। दक्षता और लागत के आधार पर ड्रोन मैनुअल श्रम के मुकाबले 78 प्रतिशत से अधिक किफायती साबित होते हैं।
भारत में 122 ड्रोन मॉडल्स को मिला सर्टिफिकेट
भारत में इस समय 122 ड्रोन मॉडल्स को टाइप सर्टिफिकेट मिला हुआ है, जिसे डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) जारी करता है। यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि ड्रोन सुरक्षा, उड़ान क्षमता और प्रदर्शन के मानकों पर खरे उतरते हैं।
इनमें से करीब:
- 70 प्रतिशत ड्रोन कृषि कार्यों, खासकर छिड़काव के लिए उपयोग हो रहे हैं
- 24 प्रतिशत ड्रोन सर्विलांस और मैपिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं
इससे स्पष्ट है कि फिलहाल भारत में ड्रोन का सबसे बड़ा उपयोग खेती के क्षेत्र में हो रहा है।
सरकारी नीतियों से मिला बढ़ावा
सरकार की नीतियों ने भी ड्रोन सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पूरी तरह तैयार ड्रोन के आयात पर रोक और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना ने स्थानीय निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा दिया है।
इसके अलावा ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन तकनीक से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि सेवाओं में उनकी भागीदारी बढ़ रही है।
कृषि मंत्रालय ड्रोन खरीद पर सब्सिडी दे रहा है, जबकि खनन, सड़क परिवहन और रक्षा मंत्रालय भी निगरानी और अन्य कार्यों के लिए ड्रोन का उपयोग बढ़ा रहे हैं।
ड्रोन उड़ाने के लिए 90% क्षेत्र ग्रीन जोन
रिपोर्ट के अनुसार भारत का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र ‘ग्रीन जोन’ में आता है, जहां ड्रोन उड़ाने के लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के बाद अब अन्य राज्यों में भी खेती में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ेगा, जिससे इस क्षेत्र में बड़ा बाजार विकसित होने की संभावना है।
