New Delhi, July 04 (ANI): Prime Minister Narendra Modi addressing at SCO Summit via video conferencing, in New Delhi on Tuesday. (ANI Photo)

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पिछले 11 सालों में भारत की खेती में बड़ी प्रगति हुई है। देश का कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो गया है। अनाज का उत्पादन 900 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है, जबकि फल और सब्जियों की पैदावार भी 640 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा बढ़ी है।
नई दिल्ली स्थित इंडियन एग्रिकल्चरल रिसर्च इंस्टिट्यूट (IARI) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के लिए दो नई योजनाएं शुरू कीं — ‘प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना’ और ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’।
पीएम मोदी ने कहा कि ये दोनों योजनाएं किसानों की ज़िंदगी बदलने का काम करेंगी। सरकार इन योजनाओं पर 35 हजार करोड़ रुपए से ज़्यादा खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि खेती हमेशा से हमारे विकास का अहम हिस्सा रही है, और अब समय के साथ खेती में नई तकनीक और सरकारी सहयोग की ज़रूरत है ताकि किसान और मज़बूत बन सकें।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में ‘बीज से लेकर बाजार तक’ कई सुधार किए हैं। इन सुधारों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। भारत आज दूध उत्पादन में दुनिया में नंबर एक है, मछली उत्पादन में दूसरा सबसे बड़ा देश है, और शहद उत्पादन 2014 की तुलना में दोगुना हो गया है।
उन्होंने आगे बताया कि अब देश में छह नई खाद फैक्ट्रियां स्थापित की गई हैं। 25 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं, 100 लाख हेक्टेयर ज़मीन में सूक्ष्म सिंचाई की सुविधा पहुंचाई गई है और पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों को करीब दो लाख करोड़ रुपए का मुआवज़ा मिला है। इसके अलावा, 10 हजार से ज़्यादा किसान उत्पादक संगठन (FPO) बनाए गए हैं।
कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कई किसानों, मछुआरों और खेती में काम करने वाली महिलाओं से भी बातचीत की और उनके अनुभव सुने। उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में देश के किसानों ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को विकसित बनाने के लिए हर क्षेत्र में लगातार सुधार करना ज़रूरी है। इसी सोच से ‘प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना’ की शुरुआत की गई है, जिसकी प्रेरणा ‘आकांक्षी जिला योजना’ की सफलता से मिली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब गरीबों और पिछड़ों को प्राथमिकता दी जाती है, तो नतीजे भी बेहतरीन आते हैं। आकांक्षी जिलों में अब मातृ मृत्यु दर कम हुई है, बच्चों की सेहत और शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है, और ये जिले अब कई मामलों में दूसरे जिलों से आगे निकल रहे हैं।
