
तेहरान, 27 मार्च।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर नरसंहार करने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से इन देशों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
अराघची ने मिनाब के शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हुए क्रूर हमले का हवाला देते हुए कहा कि इस हमले में 175 से अधिक छात्र और शिक्षक जान से गए, और यह हमला जानबूझकर और बेरहमी से किया गया। उन्होंने इसे केवल एक बड़े संकट की झलक बताया और कहा कि इस तरह के अपराधों को सामान्य बनाने की कोशिश या उनका कोई बहाना स्वीकार्य नहीं है।
अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई पर आलोचना
अराघची ने कहा कि अमेरिका और इजरायल हमेशा अपने तकनीकी और सैन्य श्रेष्ठता का दावा करते हैं। यदि वे कहते हैं कि यह हमला पूर्व नियोजित नहीं था, तो यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इसे वार क्राइम और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया और सभी को इसकी साफ और बिना शर्त निंदा करने की जरूरत बताई।
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने 600 से अधिक स्कूलों को नुकसान पहुंचाया, हजारों छात्रों और शिक्षकों को घायल या मारा, और नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे अस्पताल, एम्बुलेंस और पानी के स्रोतों को भी निशाना बनाया।
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय के लिए अपील
अराघची ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र का बुनियादी मूल्य और मानवाधिकार गंभीर संकट में हैं। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से अमेरिका-इजरायल के हमलों के खिलाफ आवाज उठाने और हमलावरों को जवाबदेह ठहराने की अपील की।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान कभी युद्ध नहीं चाहता, लेकिन देश की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए बचाव जारी रहेगा।
निष्कर्ष:
ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर सीधे आरोप लगाकर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी दी है कि मानवाधिकार और युद्ध कानूनों का उल्लंघन गंभीर परिणाम लाएगा। अराघची ने इस संकट के खिलाफ वैश्विक एकजुटता और संयुक्त राष्ट्र की सक्रिय भूमिका की आवश्यकता पर जोर दिया।
