
नई दिल्ली, 27 मार्च। पाकिस्तान अमेरिका-ईरान संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन अफगानिस्तान के साथ उसका युद्ध जारी है। इस्लामाबाद अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को आसान बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि क्षेत्रीय युद्ध को रोका जा सके, लेकिन काबुल के खिलाफ उसकी ‘खुली जंग’ जारी है।
अमेरिका-ईरान मध्यस्थता में पाकिस्तान
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका-ईरान तनाव को कम करने के लिए बातचीत का मंच बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान, तुर्किए और मिस्र के जरिए हुई अप्रत्यक्ष कूटनीति के बाद ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों में पांच दिन की सीमित रोक की घोषणा की। इस कदम के साथ पाकिस्तान ने खुद को अहम मध्यस्थ के रूप में पेश किया।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने व्हाइट हाउस के साथ बेहतर संबंधों और सऊदी अरब, यूएई और तुर्किए जैसे देशों के सहयोग का फायदा उठाकर यह पहल आगे बढ़ाई।
काबुल के खिलाफ ‘खुला जंग’
हालांकि, अफगानिस्तान के साथ संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान ने काबुल पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। हाल ही में काबुल के एक ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर में बम धमाके में 400 से अधिक लोगों की मौत हुई।
यह संघर्ष 2,600 किमी लंबी डूरंड लाइन से जुड़ा है, जिसे अफगानिस्तान पाकिस्तान की कॉलोनियल हक़ वाली जमीन मानकर खारिज करता है। पाकिस्तान तालिबान पर आरोप लगाता है कि वह 2021 में दोहा समझौते के तहत आतंकवादी समूहों पर रोक लगाने में नाकाम रहा।
पाकिस्तान की रणनीति और चुनौती
पाकिस्तान की अमेरिका-ईरान में मध्यस्थता की कोशिश रणनीतिक, आर्थिक और प्रतिष्ठा की जरूरतों से प्रेरित है। इससे वह खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जबकि अफगान सीमा पर तनाव जारी है।
विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा, “असीम मुनीर ने हाल ही में काबुल के सबसे बड़े ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल पर बमबारी की, जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हुई।” इस घटना ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाया।
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रभाव
पाकिस्तान अब अमेरिका-ईरान के उच्च स्तरीय वार्ता के लिए तटस्थ मंच बनने की कोशिश कर रहा है। सफल मध्यस्थता से उसे अर्थव्यवस्था, व्यापार और एफएटीएफ ग्रे-लिस्टिंग में राहत मिल सकती है। लेकिन यदि यह असफल रहा, तो पाकिस्तान और अलगाववादी ताकतों के बीच तनाव बढ़ सकता है और उसकी वैश्विक छवि प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान से संबंध बनाए रखना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है, लेकिन काबुल के खिलाफ हिंसा उसकी अंतरराष्ट्रीय साख को कमजोर कर सकती है।
