
वॉशिंगटन, 27 मार्च। मध्य पूर्व में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत का संतुलित और व्यावहारिक रुख इजरायल के साथ उसके रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है। पिछले तीन दशकों में दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार बढ़ी है। जो संबंध पहले सीमित कूटनीतिक बातचीत तक थे, वे अब मजबूत सुरक्षा और तकनीकी सहयोग में बदल चुके हैं।
आतंकवाद और सुरक्षा चिंताओं से बढ़ी नजदीकी
अमेरिका के थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की एक रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवाद, क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं ने भारत और इजरायल के रिश्तों को और मजबूत किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए इजरायल एक भरोसेमंद रक्षा और तकनीकी साझेदार बनकर उभरा है, जबकि भारत ने अपनी व्यापक मिडिल ईस्ट नीति के तहत अरब देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रखे हैं।
रक्षा और तकनीकी सहयोग में तेजी
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच सहयोग अब खुफिया जानकारी साझा करने, मिसाइल सिस्टम, निगरानी तकनीक और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों तक पहुंच गया है।
रक्षा नवाचार, साइबर सुरक्षा और उन्नत सैन्य तकनीक में अग्रणी होने के कारण इजरायल भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बन गया है।
संयुक्त विकास और सह-उत्पादन बना नया मील का पत्थर
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में संयुक्त विकास और सह-उत्पादन इस रिश्ते में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
इस सहयोग से दोनों देशों को लाभ मिल रहा है। जहां इजरायल अपने वैश्विक साझेदारों का दायरा बढ़ा रहा है, वहीं भारत ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के जरिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
खुफिया सहयोग और सीमा सुरक्षा पर जोर
अब सह-उत्पादन और तकनीकी आदान-प्रदान इस साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बन गए हैं। इसके साथ ही खुफिया सहयोग, आतंकवाद-रोधी रणनीतियां और सीमा सुरक्षा तकनीक भी इस रिश्ते में अहम भूमिका निभा रही हैं।
अरब देशों के साथ भी मजबूत रिश्ते
रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में भी अपने संबंध मजबूत किए हैं।
रिपोर्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि इजरायल के साथ भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत सहयोग रहा है और कठिन समय में इजरायल ने भारत का साथ दिया है।
