Proteinmaxxing क्या है? ज्यादा प्रोटीन खाना कितना फायदेमंद और कितना नुकसानदायक? जानिए हाई-प्रोटीन डाइट का सच।

आजकल सोशल मीडिया पर फिटनेस और डाइट से जुड़े कई नए ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं. इन्हीं में से एक है Proteinmaxxing. इस ट्रेंड में लोग अपनी रोजाना की डाइट में प्रोटीन को प्राथमिकता देते हैं और कोशिश करते हैं कि हर मील में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल हो. जिम जाने वाले लोगों, एथलीट्स और वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच यह ट्रेंड काफी लोकप्रिय है. चिकन, अंडे, मछली, पनीर, दाल, टोफू, ग्रीक योगर्ट और प्रोटीन सप्लीमेंट्स जैसे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ज्यादा प्रोटीन का मतलब ज्यादा फायदा है? जवाब इतना आसान नहीं है.
क्या है Proteinmaxxing?
Proteinmaxxing को एक ऐसे डाइटिंग ट्रेंड के तौर पर समझा जा सकता है जिसमें व्यक्ति अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा को प्राथमिकता देता है. इसका मुख्य उद्देश्य शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त प्रोटीन हासिल करना होता है. हालांकि सोशल मीडिया पर कई बार इस ट्रेंड को “जितना ज्यादा प्रोटीन, उतना बेहतर” के रूप में पेश किया जाता है.
लोग अपनी डाइट में आमतौर पर इन चीजों को ज्यादा शामिल करते हैं:
- अंडे
- चिकन और अन्य lean meats
- मछली
- पनीर
- दही और ग्रीक योगर्ट
- दाल और बीन्स
- सोया और टोफू
- नट्स और सीड्स
- प्रोटीन पाउडर और अन्य सप्लीमेंट्स
लेकिन किसी भी व्यक्ति के लिए सही मात्रा उसकी उम्र, शरीर के वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है.
वजन कम करने में प्रोटीन कैसे मदद कर सकता है?
वजन घटाने की कोशिश करने वालों के लिए प्रोटीन उपयोगी हो सकता है. प्रोटीन खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है. इससे बार-बार खाने या अनावश्यक स्नैकिंग को कम करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, जब कोई व्यक्ति कैलोरी कम करके वजन घटाता है, तब पर्याप्त प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि वेट लॉस डाइट में प्रोटीन को महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि, सिर्फ प्रोटीन बढ़ाने से वजन कम नहीं होता. वजन घटाने के लिए कुल कैलोरी सेवन, शारीरिक गतिविधि, नींद और पूरी डाइट का संतुलन भी महत्वपूर्ण है.
शरीर के लिए प्रोटीन क्यों जरूरी है?
प्रोटीन शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है.
यह मांसपेशियों, त्वचा और शरीर के कई ऊतकों के निर्माण और रखरखाव में भूमिका निभाता है. शरीर में एंजाइम और हार्मोन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में भी प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यही कारण है कि बच्चों के विकास से लेकर वयस्कों में मांसपेशियों के रखरखाव तक, पर्याप्त प्रोटीन जरूरी है.
जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेना अपने आप में अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ की गारंटी नहीं देता.
रोज कितना प्रोटीन लेना चाहिए?
प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है. स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य न्यूनतम अनुशंसा अक्सर शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम लगभग 0.8 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन के आसपास बताई जाती है. वहीं, नियमित रूप से व्यायाम करने वाले लोगों, एथलीट्स, बुजुर्गों या मांसपेशियों को बनाए रखने की विशेष जरूरत वाले लोगों में आवश्यकता इससे अधिक हो सकती है.
उदाहरण के लिए, 60 किलोग्राम वजन वाले व्यक्ति के लिए 0.8 ग्राम प्रति किलोग्राम के हिसाब से न्यूनतम जरूरत लगभग 48 ग्राम प्रतिदिन बनती है.
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर 60 किलो वजन वाले व्यक्ति को बिल्कुल 48 ग्राम ही प्रोटीन लेना चाहिए. वास्तविक जरूरत व्यक्ति की गतिविधि, उम्र, स्वास्थ्य और लक्ष्य के अनुसार बदल सकती है.
क्या ज्यादा प्रोटीन किडनी के लिए नुकसानदायक है?
यह Proteinmaxxing को लेकर सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में से एक है. स्वस्थ किडनी वाले लोगों में सामान्य से अधिक प्रोटीन लेने से किडनी के काम करने के तरीके में बदलाव हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर स्वस्थ व्यक्ति में हाई-प्रोटीन डाइट से किडनी खराब हो जाएगी.
हालांकि, जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उनके लिए प्रोटीन की मात्रा को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है.
किडनी शरीर से प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म से बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसलिए किडनी की बीमारी वाले लोगों में बिना डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करना उचित नहीं है.
सिर्फ प्रोटीन बढ़ाने से डाइट हेल्दी नहीं हो जाती
Proteinmaxxing का एक बड़ा जोखिम यह है कि लोग प्रोटीन पर इतना ध्यान देने लगते हैं कि डाइट के बाकी जरूरी हिस्सों को नजरअंदाज कर देते हैं. एक संतुलित डाइट में प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और स्वस्थ वसा भी जरूरी हैं.
अगर कोई व्यक्ति सिर्फ चिकन, अंडे या प्रोटीन शेक पर निर्भर हो जाए और फल-सब्जियों तथा फाइबर की मात्रा कम कर दे, तो उसकी पूरी डाइट असंतुलित हो सकती है. इसलिए लक्ष्य high protein नहीं, बल्कि balanced nutrition होना चाहिए.
नई स्टडी ने हाई-प्रोटीन डाइट को लेकर क्या कहा?
प्रोटीन की मात्रा और हेल्दी एजिंग के बीच संबंध को लेकर रिसर्च लगातार जारी है. Cell Press के एक जर्नल में प्रकाशित शोध में शोधकर्ताओं Bailey A. Knopf और Dudley W. Lamming ने प्रोटीन और amino acids के सेवन तथा metabolic health और aging से जुड़े संभावित प्रभावों पर चर्चा की. शोध में खास तौर पर mTORC1 नामक cellular pathway और कुछ amino acids की भूमिका पर ध्यान दिया गया है. mTORC1 शरीर में सेल ग्रोथ और पोषक तत्वों की उपलब्धता से जुड़ी महत्वपूर्ण cellular signaling प्रक्रिया है. इसे लंबे समय तक अधिक सक्रिय रखने और उम्र बढ़ने से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं के बीच संभावित संबंधों पर वैज्ञानिक अध्ययन चल रहे हैं.
रिसर्च में methionine जैसे amino acids को सीमित करने के संभावित प्रभावों पर भी चर्चा की गई है.
लेकिन यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि ऐसी रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि आम लोगों को अपनी डाइट से प्रोटीन कम कर देना चाहिए या methionine को खुद से सीमित करना शुरू कर देना चाहिए.
क्या कम प्रोटीन खाने से लंबी उम्र बढ़ सकती है?
यह दावा अभी इतना सीधा नहीं है.
जानवरों और cellular models में protein या कुछ amino acids को सीमित करने से aging और metabolic health से जुड़े कुछ संभावित फायदे देखे गए हैं. लेकिन इन्हें सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता. इंसानों में उम्र बढ़ने, प्रोटीन सेवन और स्वास्थ्य के बीच संबंध काफी जटिल है. इसलिए सोशल मीडिया पर “कम प्रोटीन = लंबी उम्र” या “ज्यादा प्रोटीन = जल्दी बुढ़ापा” जैसी सीधी बातें वैज्ञानिक निष्कर्ष का सही प्रतिनिधित्व नहीं करतीं.
Proteinmaxxing में सबसे बड़ी गलती क्या है?
इस ट्रेंड को अपनाने में सबसे बड़ी गलती है अपनी जरूरत जाने बिना प्रोटीन की मात्रा लगातार बढ़ाते जाना.कई लोग सोशल मीडिया पर किसी फिटनेस इन्फ्लुएंसर की डाइट देखकर वही मात्रा खुद भी लेना शुरू कर देते हैं. लेकिन एक पेशेवर एथलीट, ऑफिस में काम करने वाले व्यक्ति, बुजुर्ग और किसी बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत एक जैसी नहीं होती. इसीलिए डाइट हमेशा व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से तय होनी चाहिए.
Protein Powder लेना जरूरी है क्या?
अगर किसी व्यक्ति को सामान्य भोजन से पर्याप्त प्रोटीन मिल रहा है, तो हर किसी के लिए प्रोटीन पाउडर लेना जरूरी नहीं है. अंडे, दूध, दही, पनीर, दाल, बीन्स, सोया, मछली और मांस जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के प्राकृतिक स्रोत हैं. Protein supplement उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जिन्हें भोजन से अपनी जरूरत पूरी करना मुश्किल लगता है, लेकिन इसे स्वस्थ भोजन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी सप्लीमेंट को नियमित रूप से शुरू करने से पहले उसकी जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति पर विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है.
किन लोगों को हाई-प्रोटीन डाइट से सावधान रहना चाहिए?
कुछ लोगों को Proteinmaxxing जैसे ट्रेंड को अपनाने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेनी चाहिए.
खास तौर पर:
- किडनी की बीमारी वाले लोग
- लिवर से जुड़ी बीमारी वाले लोग
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं
- बच्चे और किशोर
- किसी विशेष चिकित्सकीय डाइट पर रहने वाले लोग
- लंबे समय से दवाएं लेने वाले लोग
इन लोगों के लिए प्रोटीन की जरूरत और सुरक्षित मात्रा अलग हो सकती है.
Proteinmaxxing को सही तरीके से कैसे अपनाएं?
अगर आपका लक्ष्य मांसपेशियां बढ़ाना या वजन कम करना है, तो सिर्फ प्रोटीन पर ध्यान देने के बजाय पूरी डाइट को संतुलित रखें.
इन बातों का ध्यान रखें:
- अपनी प्रोटीन जरूरत को समझें.
- प्रोटीन के अलग-अलग स्रोतों को डाइट में शामिल करें.
- फल और सब्जियों की पर्याप्त मात्रा लें.
- फाइबर को नजरअंदाज न करें.
- पर्याप्त पानी पिएं.
- नियमित व्यायाम करें.
- बिना जरूरत सप्लीमेंट्स की मात्रा न बढ़ाएं.
- किसी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें.
Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जानकारी के लिए है. यह किसी बीमारी के इलाज या व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है. अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने या हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करने से पहले, खासकर यदि कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह ले
