पाकिस्तान क्रिकेट में फिर मचा हड़कंप!

पाकिस्तान क्रिकेट एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इंग्लैंड दौरे पर टीम के खराब प्रदर्शन के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने एक आंतरिक अनुशासनात्मक जांच शुरू की है। बोर्ड ने जांच की वजह से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन खिलाड़ियों के मोबाइल फोन जब्त किए जाने और टीम में बड़े बदलावों की खबरों ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है।
पाकिस्तान की टीम इन दिनों इंग्लैंड के दौरे पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है। शुरुआती दो मुकाबलों में टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद लॉर्ड्स टेस्ट से जुड़े घटनाक्रम में PCB ने कथित तौर पर 7 खिलाड़ियों और 2 कोच को वापस भेजने का फैसला किया। साथ ही कुछ खिलाड़ियों के मोबाइल फोन भी बोर्ड के पास जमा कराए जाने की बात सामने आई।
शुरुआत में इन फैसलों को टीम के खराब प्रदर्शन और अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन अब PCB की ओर से आंतरिक जांच की पुष्टि किए जाने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बोर्ड किस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहा है?
PCB ने क्या कहा?
PCB के मीडिया और डिजिटल कम्युनिकेशन डायरेक्टर आमिर मीर ने सोमवार, 7 सितंबर को एक बयान जारी कर जांच की जानकारी दी। बोर्ड के मुताबिक, मीडिया में सामने आई अनुशासन और खिलाड़ियों के व्यवहार से जुड़ी रिपोर्टों के बाद आंतरिक अनुशासनात्मक जांच शुरू की गई है।
PCB ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल मामले की आंतरिक समीक्षा चल रही है और पूरी प्रक्रिया बोर्ड के निर्धारित नियमों के अनुसार की जा रही है। बोर्ड ने सोशल मीडिया और कुछ प्लेटफॉर्म पर चल रही अपुष्ट खबरों और अटकलों पर भी लोगों से भरोसा न करने की अपील की है। PCB का कहना है कि आधिकारिक जानकारी के लिए केवल बोर्ड के अधिकृत स्रोतों पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।
आखिर किस मामले की हो रही है जांच?
बोर्ड ने अपने बयान में जांच का सटीक कारण नहीं बताया है। यही वजह है कि फिलहाल मैच-फिक्सिंग से जुड़े किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हालांकि, खिलाड़ियों के मोबाइल फोन जब्त किए जाने की खबर और टीम में अचानक किए गए बदलावों ने क्रिकेट जगत में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है। यह भी साफ नहीं है कि कितने खिलाड़ियों के मोबाइल फोन बोर्ड ने अपने कब्जे में लिए हैं और जांच में इनका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
यानी फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन PCB की जांच ने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान क्रिकेट में फिक्सिंग का पुराना साया
पाकिस्तान क्रिकेट के लिए मैच-फिक्सिंग का मुद्दा नया नहीं है। यही वजह है कि मौजूदा घटनाक्रम की तुलना 2010 के चर्चित स्पॉट-फिक्सिंग मामले से भी की जा रही है।
2010 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान पाकिस्तान के तत्कालीन कप्तान सलमान बट, तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर स्पॉट-फिक्सिंग मामले में फंस गए थे।
इन खिलाड़ियों पर जानबूझकर नो-बॉल कराने के बदले बुकी से पैसे लेने के आरोप साबित हुए थे। इसके बाद तीनों पर क्रिकेट से प्रतिबंध लगाया गया और उन्हें कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा। उस घटना ने पाकिस्तान क्रिकेट की छवि को बड़ा झटका दिया था। ऐसे में अब PCB की नई जांच ने पुराने जख्मों और फिक्सिंग से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
क्या सच में मैच-फिक्सिंग हुई है?
PCB ने अभी तक यह नहीं कहा है कि उसकी जांच मैच-फिक्सिंग को लेकर है। आधिकारिक बयान में सिर्फ अनुशासन और व्यवहार से संबंधित मीडिया रिपोर्टों के बाद शुरू हुई आंतरिक जांच की बात कही गई है। इसलिए मौजूदा समय में मैच-फिक्सिंग को लेकर सामने आ रही चर्चाओं को अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक PCB या किसी सक्षम जांच एजेंसी की ओर से कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आती।
लॉर्ड्स टेस्ट के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान का प्रदर्शन पहले ही सवालों के घेरे में है। शुरुआती दो टेस्ट मैचों में हार के बाद टीम में कई बदलाव किए गए। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ से जुड़े फैसलों के बाद मामला और चर्चा में आ गया। इसके बाद खिलाड़ियों के मोबाइल फोन जब्त किए जाने की खबर सामने आई। सामान्य तौर पर किसी आंतरिक जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच की जा सकती है, लेकिन इस मामले में PCB ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि मोबाइल क्यों लिए गए और उनसे क्या जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। यही अस्पष्टता इस पूरे मामले को लेकर सस्पेंस बढ़ा रही है।
फिलहाल PCB ने जांच को लेकर ज्यादा जानकारी साझा करने से इनकार किया है। बोर्ड का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या PCB खिलाड़ियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है।
