प्रस्तावना

हैदराबाद, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़े अवैध सरोगेसी रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई। इस दौरान ईडी ने 9 स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में दस्तावेज और आपत्तिजनक सबूत जब्त किए।
ईडी की छापेमारी की विस्तृत जानकारी

- ईडी ने 25 सितंबर को 9 ठिकानों पर छापेमारी की।
- तलाशी अभियान हैदराबाद, विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चलाया गया।
- बड़ी संख्या में नकली सरोगेसी समझौते, संपत्ति से जुड़े कागजात और धोखाधड़ी के शिकार दंपतियों का रिकॉर्ड बरामद हुआ।
- ईडी ने इन दस्तावेजों को मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक साजिश से जुड़े मामलों का सबूत बताया।
सरोगेसी रैकेट का संचालन
- यह रैकेट यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर के नाम से चल रहा था।
- इसे डॉ. पचीपल्ली नम्रता उर्फ अथलूरी नम्रता संचालित कर रही थीं।
- प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पिछले कई वर्षों से यह रैकेट सक्रिय था।
- रैकेट का नेटवर्क न केवल हैदराबाद, बल्कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई शहरों में फैला हुआ था।
रैकेट का तरीका
- सरोगेसी सेवाओं को वैध दिखाने के लिए नकली दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
- असल में इन सेवाओं का इस्तेमाल बच्चा तस्करी और धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।
- दंपतियों को फर्जी अनुबंधों और आकर्षक पैकेजों के जरिए ठगा जाता था।
- अपराध की आय से अचल संपत्तियों और अन्य निवेशों में पैसा लगाया गया।
कानूनी पृष्ठभूमि
- यह कार्रवाई गोपालपुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर की गई।
- एफआईआर में धोखाधड़ी, धोखा, आपराधिक साजिश, अवैध सरोगेसी और बच्चा तस्करी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
- अब ईडी इन मामलों को पीएमएलए के तहत जांच रही है।
पीड़ितों की स्थिति
- बरामद दस्तावेजों से सामने आया कि बड़ी संख्या में दंपतियों को ठगा गया।
- कई परिवारों ने बच्चे पाने की उम्मीद में बड़ी रकम चुकाई।
- लेकिन बदले में उन्हें या तो फर्जी अनुबंध दिए गए या फिर सरोगेसी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
- इससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि भावनात्मक और मानसिक आघात भी झेलना पड़ा।
अवैध सरोगेसी और कानून
- भारत में सरोगेसी पर सख्त नियम लागू हैं।
- केवल अल्ट्रूइस्टिक सरोगेसी (निस्वार्थ आधार पर) की अनुमति है।
- वाणिज्यिक सरोगेसी और इससे जुड़े रैकेट कानूनन अपराध हैं।
- ईडी की कार्रवाई यह संकेत देती है कि इस तरह के रैकेट पर सरकार की निगरानी और कड़ी हो रही है।
ईडी की अगली कार्रवाई
- जब्त दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
- डॉ. नम्रता और उनसे जुड़े अन्य सहयोगियों से पूछताछ की तैयारी है।
- ईडी की कोशिश है कि अपराध से अर्जित संपत्ति को भी जब्त किया जाए।
- आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
समग्र विश्लेषण

हैदराबाद का यह मामला अवैध सरोगेसी और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करता है। सरोगेसी कानून का उल्लंघन करके न केवल दंपतियों को आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। ईडी की कार्रवाई से साफ है कि ऐसे रैकेट अब ज्यादा देर तक कानून की आंखों से छिप नहीं सकते।
