बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप: 3 बलूचों की हत्या, 5 लोगों को जबरन गायब करने का दावा

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा और जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन बलूच नागरिकों की न्यायेत्तर (एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल) हत्या की है और पांच अन्य लोगों को जबरन गायब कर दिया गया है।
मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के अनुसार, 17 वर्षीय छात्र सादिक नूर और 40 वर्षीय ड्राइवर मुस्लिम दाद के शव शुक्रवार को केच जिले के तुर्बत इलाके में बरामद हुए। दोनों पिछले सात महीनों से लापता थे। संगठन का आरोप है कि उन्हें पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने कथित तौर पर अगवा किया था।
बीवाईसी के मुताबिक, सादिक नूर और मुस्लिम दाद को 7 सितंबर 2025 को तुर्बत के अबसार इलाके में उनके घरों से जबरन उठाया गया था। इसके बाद से दोनों का कोई पता नहीं था।
संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह कोई अलग-थलग मामला नहीं बल्कि एक पैटर्न है। बीवाईसी के अनुसार, बलूचिस्तान में बिना किसी जवाबदेही के लोगों को उठाया जाता है और न्याय की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया जाता है।
बीवाईसी ने यह भी बताया कि 19 वर्षीय छात्र कंबर बलूच का गोलियों से छलनी शव 8 अप्रैल को तुर्बत में फेंका हुआ मिला था। शव पर गंभीर यातना के निशान भी पाए गए। कंबर बलूच को भी 7 अक्टूबर 2025 को उनके घर से जबरन गायब कर दिया गया था।
मानवाधिकार संगठन ने कहा कि बिना किसी आरोप या मुकदमे के बलूच युवाओं को गायब करना, यातना देना और उनकी हत्या करना मानवाधिकारों और पाकिस्तान के संविधान का सीधा उल्लंघन है।
इस बीच एक अन्य संगठन बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने भी आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने पांच आम बलूच नागरिकों को जबरन गायब कर दिया है।
संगठन के अनुसार, 20 वर्षीय नजीब अशरफ और 30 वर्षीय मजदूर अल्लाह बख्श को 8 अप्रैल को बलूचिस्तान के सुराब इलाके से जबरन उठाया गया। इसके बाद से उनके परिवारों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिससे परिवार गहरी चिंता और अनिश्चितता में हैं।
इसके अलावा उसी दिन पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने कराची में देर रात एक ऑपरेशन के दौरान एक महिला समेत तीन बलूच नागरिकों को हिरासत में लिया।
इनकी पहचान 18 वर्षीय छात्र सलमान, 16 वर्षीय शहजाद और 24 वर्षीय शिक्षिका शकीला के रूप में हुई है।
बीवीजे ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इन लोगों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और न ही उन्हें किसी अदालत में पेश किया गया है। परिवारों को भी उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी जा रही है।
मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे बलूचिस्तान की स्थिति पर ध्यान दें और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराएं।
