
नई दिल्ली, 13 मार्च। अमेरिका द्वारा सभी देशों को रूसी कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी मंजूरी दिए जाने के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।
खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 0.47 प्रतिशत गिरकर 99.99 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.67 प्रतिशत गिरकर 95.09 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
अमेरिका ने दी अस्थायी छूट
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि मौजूदा आपूर्ति को सुचारु रखने के लिए अमेरिका ने सभी देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अस्थायी छूट दी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक सीमित और अल्पकालिक कदम है, जो केवल उन तेल खेपों पर लागू होगा जो पहले से ही समुद्री मार्ग से परिवहन में हैं।
रूस को नहीं होगा बड़ा आर्थिक फायदा
स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इस अस्थायी अनुमति से रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि रूस को अपने ऊर्जा राजस्व का अधिकांश हिस्सा तेल के निष्कर्षण स्थल पर लगाए गए करों से प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी अस्थायी है और लंबे समय में यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा।
किन खेपों पर लागू होगी छूट
अमेरिका द्वारा दी गई यह छूट रूसी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगी, जिन्हें 12 मार्च को पूर्वी समयानुसार रात 12:01 बजे या उससे पहले जहाजों पर लादा गया था।
अमेरिका ने जारी किया रणनीतिक तेल भंडार
इस बीच, अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा भी की है, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके।
भारत ने भी सुनिश्चित की तेल आपूर्ति
भारत सरकार ने कहा है कि देश में कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और उपलब्ध भंडार होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति से भी अधिक है।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, संघर्ष से पहले भारत के लगभग 45 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात होर्मुज मार्ग से होता था।
भारत ने बढ़ाया तेल आयात का दायरा
पुरी ने बताया कि भारत ने तेल आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए आयात स्रोतों में विविधता बढ़ाई है।
संघर्ष शुरू होने से पहले गैर-होर्मुज स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद 55 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गई है।
अब 40 देशों से तेल खरीद रहा भारत
भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि 2006-07 में यह संख्या सिर्फ 27 देशों तक सीमित थी।
सरकार का कहना है कि वर्षों से अपनाई गई इस नीति के कारण भारत के पास अब कई वैकल्पिक स्रोत मौजूद हैं।
पूरी क्षमता पर काम कर रही रिफाइनरियां
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि देश की रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और कई मामलों में तो वे 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर संचालन कर रही हैं।
