
जैश-ए-मोहम्मद के टेरर मॉड्यूल में शामिल मुजम्मिल शकील की गिरफ्तारी ने जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग दिए हैं। मुजम्मिल के फोन की जांच में पता चला कि उसकी गतिविधियां कई महीनों से चल रही थीं और इस साल वह कई बार दिल्ली आया। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत यात्रा नहीं था, बल्कि किसी बड़े प्लानिंग का हिस्सा था।
फोन से मिली जानकारी और गतिविधियां
मुजम्मिल के फोन से कई अहम सबूत मिले हैं। इनमें दिल्ली की कई जगहों की तस्वीरें बरामद हुई हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है कि वह किन क्षेत्रों में गया और वहां किस उद्देश्य से गया था। इसके अलावा, उसके फोन में कई व्हाट्सएप ग्रुप भी मिले, जिनमें संदिग्ध लोग जुड़े हुए थे। गिरफ्तारी के बाद कई लोग इन ग्रुप्स को छोड़ गए। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि ग्रुप छोड़ने के पीछे डर था या वे भी इस मॉड्यूल का हिस्सा थे।
एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि मुजम्मिल ने दिल्ली में किन लोगों से संपर्क किया, क्या उसने स्थानीय संपर्क बनाए या किसी बड़े नेटवर्क से संपर्क किया, और क्या वह अकेला आया था या उसके साथ अन्य लोग भी मौजूद थे।
मुजम्मिल शकील कौन है?
मुजम्मिल शकील को जम्मू-कश्मीर पुलिस और फरीदाबाद पुलिस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया गया। वह पीसीसी डॉक्टर है और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पिछले लगभग साढ़े तीन साल से कार्यरत था।
हथियार और विस्फोटक बरामदगी
मुजम्मिल की निशानदेही पर फरीदाबाद पुलिस ने एक स्विफ्ट कार जब्त की। इसमें Krinkob असॉल्ट राइफल (जो दिखने में AK-47 जैसी है), तीन मैगजीन और 83 राउंड कारतूस बरामद हुए। इसके अलावा, एक पिस्टल, दो पिस्टल की मैगजीन और दो खाली खोखे भी पुलिस को मिले।
धोज इलाके में मुजम्मिल के निशानदेही पर लगभग 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया। जानकारी के अनुसार, यह जखीरा लगभग 15 दिन पहले ही उसके पास पहुंचा था।
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े तार
जांच में यह सामने आया कि मुजम्मिल का जैश-ए-मोहम्मद से सीधा संपर्क है। पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है और उसकी गतिविधियों, संपर्कों और मॉड्यूल में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में लगी हुई है।
जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई
मुजम्मिल को 10 दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। पुलिस अब उसके फोन, व्हाट्सएप ग्रुप्स, यात्रा रिकॉर्ड और हथियारों से जुड़े सबूतों की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि उसके नेटवर्क में और कौन शामिल थे और क्या दिल्ली में किसी बड़े ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी।
इस मामले की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मुजम्मिल की गतिविधियों का दायरा कितना बड़ा था और देश में किस तरह की सुरक्षा खामियों को देखते हुए इसे रोका जा सकता था।
