
नई दिल्ली, 12 मार्च। भारत की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत वृद्धि दर से आगे बढ़ती रहेगी। जापान की दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक नोमुरा ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बावजूद वित्त वर्ष 2027 में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 7 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।
‘गोल्डीलॉक्स’ दौर के लिए परीक्षा
नोमुरा के अनुसार, अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो यह भारत के ‘गोल्डीलॉक्स पीरियड’ के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
अर्थशास्त्र में गोल्डीलॉक्स उस स्थिति को कहा जाता है जब जीडीपी वृद्धि मजबूत रहती है और महंगाई अपेक्षाकृत कम और स्थिर स्तर पर बनी रहती है।
महंगाई और चालू खाते का अनुमान बदला
नोमुरा की भारत और एशिया (जापान को छोड़कर) की मुख्य अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने ऑरोदीप नंदी के साथ एक नोट में कहा कि बैंक ने अपने कई आर्थिक अनुमानों में बदलाव किया है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- चालू खाता घाटा (CAD) का अनुमान 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर जीडीपी का 1.6 प्रतिशत किया गया है।
- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई का अनुमान 0.7 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत किया गया है।
- जीडीपी वृद्धि अनुमान में 0.1 प्रतिशत की मामूली कटौती कर इसे 7.0 प्रतिशत रखा गया है।
उपभोग और उद्योग में बनी हुई है रफ्तार
नोमुरा के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि देश में उपभोग और औद्योगिक गतिविधियों में गति बनी हुई है।
हालांकि, निर्यात और सरकारी खर्च में कमजोरी देखने को मिल सकती है।
ऊर्जा संकट का खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति, खासकर प्राकृतिक गैस की कमी, भारत में औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
सुधारों से मिलेगी मजबूती
इसके बावजूद नोमुरा का मानना है कि पिछली नीतिगत ढील, संरचनात्मक सुधार, उच्च वेतन वृद्धि और अमेरिका के साथ व्यापार तनाव में कमी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में चक्रीय सुधार देखने को मिल सकता है।
ब्याज दरों पर भी असर संभव
इन्वेस्टमेंट बैंक ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण अधिकांश केंद्रीय बैंक फिलहाल रेपो रेट को स्थिर रख सकते हैं।
हालांकि, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।
