
दोहा, 19 मार्च। कतर ने रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमले के बाद सख्त कदम उठाते हुए ईरानी राजनयिकों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित कर दिया है। इस फैसले के तहत ईरानी दूतावास के सैन्य अटैशे, सुरक्षा अटैशे और उनके स्टाफ को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।
हमले की कड़ी निंदा
कतर सरकार ने इस हमले को
- देश की संप्रभुता का उल्लंघन
- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा
बताया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन है।
क्या होता है ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’?
जब कोई देश किसी विदेशी राजनयिक को स्वीकार करने से इनकार करता है या उसे देश छोड़ने का आदेश देता है, तो उसे
‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित किया जाता है।
कतर का सख्त संदेश
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि कतर
- शुरू से ही इस संघर्ष से दूर रहने की नीति पर है
- लेकिन ईरान की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रही है
मंत्रालय के अनुसार,
यह गैर-जिम्मेदाराना कदम अंतरराष्ट्रीय शांति को भी प्रभावित कर सकता है।
UN से की अपील
कतर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील की है कि:
- ऐसे उल्लंघनों को रोका जाए
- जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो
- वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित
कतर ने स्पष्ट किया है कि
यूएन चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत उसे आत्मरक्षा का अधिकार है।
सरकार ने कहा कि वह
- अपनी संप्रभुता
- नागरिकों की सुरक्षा
- और राष्ट्रीय हितों की रक्षा
के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार है।
राजनयिक स्तर पर बढ़ा तनाव
यह फैसला कतर के प्रोटोकॉल डायरेक्टर इब्राहिम यूसुफ फखरो और ईरान के राजदूत अली सालेहाबादी के बीच हुई बैठक के बाद आधिकारिक नोट के जरिए लिया गया।
कतर ने साफ कहा कि
ईरान की लगातार कार्रवाई ‘अच्छे पड़ोसी’ के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव
इस घटनाक्रम के बाद
मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कतर ने संकेत दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए आगे भी कड़े कदम उठा सकता है।
