🥚 अंडे के दाम बढ़े, अब चिकन की बारी? सावन के बाद बढ़ सकती है कीमतों पर हलचल! जानें क्या है वजह......

खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों के बीच अब अंडे के दाम में भी तेजी देखने को मिल रही है. कई जगह खुदरा बाजार में एक अंडे की कीमत करीब 9 रुपये तक पहुंच गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सावन खत्म होने के बाद चिकन की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है?
अंडे की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता…..
महंगाई का असर अब लोगों की रोजमर्रा की खाने की थाली पर भी नजर आने लगा है. चीनी और दाल जैसी जरूरी चीजों के बाद अंडे की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है. कई जगह अंडे का खुदरा भाव करीब 9 रुपये प्रति अंडे तक पहुंच गया है. पिछले एक साल में अंडे की कीमतों में करीब 35 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी बताई जा रही है. अंडा आम लोगों के लिए प्रोटीन का किफायती स्रोत माना जाता है. ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से घरेलू बजट पर भी असर पड़ सकता है. वहीं, अंडे के बाद अब चिकन की कीमत को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है.
क्यों बढ़ रहे हैं अंडे के दाम….?
अंडे की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. इनमें सबसे प्रमुख वजह पोल्ट्री फीड यानी मुर्गियों के चारे की बढ़ती लागत है. मुर्गियों के दाने में मक्के का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है और मक्के की कीमत बढ़ने से पोल्ट्री कारोबार की लागत भी बढ़ जाती है. मक्के की मांग इन दिनों एथेनॉल उत्पादन के कारण भी बढ़ी हुई है. इससे पोल्ट्री सेक्टर के लिए फीड की लागत पर दबाव बढ़ सकता है. बताया जाता है कि मुर्गी पालन की कुल लागत में फीड की हिस्सेदारी करीब 65 से 70 फीसदी तक हो सकती है. ऐसे में दाने की कीमत में बदलाव का सीधा असर अंडे और चिकन की लागत पर पड़ता है.
गर्मी और मौसम ने भी डाला असर….
पोल्ट्री सेक्टर के लिए सिर्फ फीड की बढ़ती कीमत ही चुनौती नहीं है. तेज गर्मी और मौसम में बदलाव का असर भी मुर्गियों के उत्पादन पर पड़ सकता है. अत्यधिक गर्मी की स्थिति में मुर्गियों की अंडे देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. कुछ इलाकों में गर्मी के कारण मुर्गियों की मृत्यु होने से उत्पादन और सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है. जब बाजार में सप्लाई मांग के मुकाबले कम होती है तो कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है.
क्या सावन के बाद चिकन होगा महंगा….?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सावन खत्म होने के बाद चिकन के दाम बढ़ जाएंगे? इसका सीधा जवाब अभी देना मुश्किल है. सावन के दौरान कई लोग धार्मिक कारणों से मांसाहार से दूरी बनाते हैं. ऐसे में चिकन की मांग कुछ बाजारों में कम रह सकती है. सावन खत्म होने के बाद मांग बढ़ने पर चिकन की कीमतों पर असर पड़ सकता है. लेकिन केवल सावन खत्म होना ही कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं है. चिकन के दाम मुख्य रूप से मांग, सप्लाई, पोल्ट्री फीड की लागत, उत्पादन और स्थानीय बाजार की स्थिति जैसे कई कारकों पर निर्भर करते हैं.
मक्का और सोयाबीन की कीमतों पर रहेगी नजर….
पोल्ट्री उद्योग में मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल का महत्वपूर्ण इस्तेमाल होता है. यदि इनकी कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो मुर्गी पालन की लागत भी बढ़ सकती है. इसका असर आगे चलकर अंडे और चिकन दोनों के बाजार भाव पर दिखाई दे सकता है. कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी या होगी भी या नहीं, इसका अनुमान स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और आने वाले दिनों की सप्लाई-मांग के आधार पर ही लगाया जा सकता है.
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर….?
अगर अंडे और चिकन दोनों के दाम लंबे समय तक ऊंचे रहते हैं तो इसका असर घरों के बजट के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस पर भी पड़ सकता है. दूसरी तरफ, अगर उत्पादन और सप्लाई में सुधार होता है तो कीमतों पर दबाव कम भी हो सकता है.
निष्कर्ष : अंडे की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे फीड की लागत, मक्का की कीमत, मौसम और सप्लाई जैसे कई कारण हैं. सावन के बाद चिकन की मांग बढ़ सकती है, लेकिन चिकन के महंगे होने की स्थिति अभी निश्चित नहीं है. आने वाले दिनों में पोल्ट्री फीड की कीमत और बाजार में मांग-सप्लाई की स्थिति इस मामले में अहम भूमिका निभाएगी…..
