
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को आईएमसी 2025 नेशनल बिल्डर्स समिट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 11 वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल हाईवे बनाया है। यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है जिसने हर नागरिक को सशक्त बनाया है।
भारत की डिजिटल क्रांति: एक नई दिशा
सिंधिया ने कहा कि भारत में अब हर व्यक्ति तकनीकी रूप से सशक्त है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक, डिजिटल कनेक्टिविटी ने देश के हर कोने को जोड़ा है। उन्होंने बताया कि आज भारत में 1.2 अरब मोबाइल सब्सक्राइबर्स हैं, यानी पूरी दुनिया के 20 प्रतिशत मोबाइल उपयोगकर्ता भारत में रहते हैं।
उन्होंने कहा,
“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने 11 सालों में दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल हाईवे बनाया है, जिसने 1.4 अरब भारतीयों को वैश्विक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा है।”
डिजिटल इंडिया: अभूतपूर्व वृद्धि के आँकड़े

सिंधिया ने डिजिटल इंडिया के आँकड़े साझा करते हुए कहा कि 11 वर्ष पहले भारत में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन केवल 25 करोड़ था, जो अब बढ़कर 97.4 करोड़ हो गया है। वहीं, ब्रॉडबैंड कनेक्शन की संख्या भी 6 करोड़ से बढ़कर 94.4 करोड़ हो चुकी है।
इस परिवर्तन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और रोजगार के क्षेत्र में गहरा प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल क्रांति सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
युवाओं में नई सोच और उद्यमशीलता
सिंधिया ने कहा कि वे भारत के एक ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहाँ आज हर युवा “रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनना चाहता है।”
उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं में नई तकनीक सीखने और उसे समाज के विकास के लिए उपयोग करने की क्षमता है।
“हर छोटे शहर से आज उद्यमी पैदा हो रहे हैं। यही भारत की असली ताकत है,”
— ज्योतिरादित्य सिंधिया
उन्होंने बताया कि पहले लिस्टेड कंपनियाँ केवल छह महानगरों में केंद्रित थीं, लेकिन आज अधिकांश कंपनियाँ टियर-2 और टियर-3 शहरों से हैं — यह दर्शाता है कि भारत का हर कस्बा आज नवाचार का केंद्र बन रहा है।
यूपीआई और डिजिटल भुगतान में भारत अग्रणी
सिंधिया ने कहा कि भारत का यूपीआई (Unified Payments Interface) आज विश्व की सबसे सफल डिजिटल भुगतान प्रणाली है।
उन्होंने बताया कि हर महीने लगभग 20 अरब लेनदेन यूपीआई के जरिए होते हैं — जो सालाना 260 अरब से अधिक लेनदेन हैं।
“दुनिया के कुल डिजिटल लेनदेन का 46 प्रतिशत भारत में होता है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं,”
— सिंधिया ने कहा।
उन्होंने जोड़ा कि यूपीआई ने छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और किसानों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है। इससे भारत कैशलेस समाज की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
डिजिटल हाईवे: देश को जोड़े रखने की रीढ़
सिंधिया ने बताया कि भारत ने न सिर्फ मोबाइल और इंटरनेट की पहुँच बढ़ाई, बल्कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) तैयार किया जो पूरे सिस्टम को जोड़ता है।
इस हाईवे ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, रोजगार, और शासन व्यवस्था को एक डिजिटल फ्रेमवर्क में समाहित किया।
उन्होंने कहा कि यह डिजिटल हाईवे आने वाले दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि की रीढ़ बनेगा।
पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक डिजिटल विस्तार
सिंधिया ने अपने पूर्वोत्तर राज्यों के उदाहरण से बताया कि वहाँ अब डिजिटल शिक्षा और उद्यमिता दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।
“मेरे आठ पूर्वोत्तर राज्यों में आज 91% साक्षरता दर है और 75% आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है। ये युवा आज हस्तशिल्प, सेमी-कंडक्टर, और डिजिटल सर्विसेज में विश्व स्तर पर जुड़ने को तैयार हैं।”
डिजिटल सशक्तिकरण से आत्मनिर्भर भारत

भारत के इस डिजिटल विकास ने नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के तीन स्तंभों को मजबूती दी है।
हर क्षेत्र — चाहे कृषि हो या ई-कॉमर्स — डिजिटल तकनीक से जुड़कर अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन गया है।
सिंधिया ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के लिए डिजिटल तकनीक का “मॉडल देश” बनेगा।
भविष्य की दिशा
सिंधिया ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इंटरनेट पहुँचाना नहीं, बल्कि हर नागरिक को डिजिटल अवसरों से जोड़ना है।
“भारत में अब डिजिटल तकनीक केवल सुविधा नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का माध्यम है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विज़न “सभी के लिए डिजिटल भारत” के तहत आने वाले वर्षों में 5G, AI और सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।
निष्कर्ष
पिछले 11 वर्षों में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में जो क्रांति की है, वह न केवल देश की अर्थव्यवस्था बल्कि नागरिकों के जीवन को भी बदल चुकी है।
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत अब दुनिया का डिजिटल नेतृत्वकर्ता बन चुका है, और आने वाले समय में यह यात्रा भारत को तकनीकी महासत्ता के रूप में स्थापित करेगी।
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