प्रस्तावना

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस) — भारतीय कुश्ती जगत में बड़ा झटका देते हुए,
भारतीय कुश्ती महासंघ (Wrestling Federation of India – WFI) ने
पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले अमन सहरावत को
एक साल के लिए निलंबित कर दिया है।
22 वर्षीय सहरावत को क्रोएशिया के जाग्रेब में आयोजित
विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान वजन सीमा का उल्लंघन करने पर
अयोग्य घोषित किया गया था।
इस घटना के बाद महासंघ ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
निलंबन का कारण और अवधि
भारतीय कुश्ती महासंघ ने पुष्टि की कि अमन सहरावत का निलंबन 23 सितंबर 2025 से प्रभावी हुआ,
जो सितंबर 2026 तक लागू रहेगा।
इस अवधि में सहरावत राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर की किसी भी कुश्ती गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगे।
महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने आईएएनएस से कहा:
“अमन सहरावत को वजन संबंधी नियमों का उल्लंघन करने पर निलंबित किया गया है।
उन्हें अनुशासनात्मक नोटिस भेजा गया था,
लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।”
जाग्रेब विश्व चैंपियनशिप में विवाद
अमन सहरावत 57 किलोग्राम वर्ग में भाग लेने वाले थे,
लेकिन उनका वजन निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया।
कुश्ती के सख्त नियमों के तहत,
यदि कोई खिलाड़ी निर्धारित वजन वर्ग से बाहर जाता है,
तो उसे स्वचालित रूप से डिसक्वालिफाई (Disqualify) कर दिया जाता है।
यह घटना 14 सितंबर को हुई,
जब सहरावत क्रोएशिया के पोरेक में प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए।
उनके पास वजन और फिटनेस को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त समय था,
लेकिन फिर भी वे आवश्यक मानकों को पूरा नहीं कर सके।
महासंघ का मानना है कि यह लापरवाही
“एथलेटिक प्रोफेशनलिज्म की गंभीर कमी” को दर्शाती है।
कुश्ती महासंघ की कार्रवाई और प्रक्रिया
भारतीय कुश्ती महासंघ ने अमन सहरावत को पहले शो-कॉज नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया था,
जिसका जवाब उन्हें 7 दिनों में देना था।
सहरावत के जवाब में उन्होंने
वजन बढ़ने का कारण डाइट और ट्रेनिंग में बदलाव बताया,
लेकिन महासंघ ने इसे स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद महासंघ की अनुशासनात्मक समिति ने
23 सितंबर से एक साल के निलंबन की सिफारिश की,
जिसे महासंघ के कार्यकारी बोर्ड ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
सहरावत के करियर पर असर

यह निलंबन सहरावत के करियर पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
वे 2026 एशियाई खेलों (Asian Games) और 2027 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटे थे।
निलंबन के कारण वे आने वाले राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों और सेलेक्शन ट्रायल्स में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि
एक साल का ब्रेक खिलाड़ी की शारीरिक लय और मानसिक आत्मविश्वास दोनों को प्रभावित करता है।
हालांकि, कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने सुझाव दिया है कि
सहरावत को इस अवधि में अपने फिटनेस और तकनीकी कौशल पर
ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि वे वापसी कर सकें।
हालिया अनुशासनात्मक घटनाओं की कड़ी
अमन सहरावत का मामला पिछले एक साल में
तीसरा बड़ा अनुशासनिक विवाद है जिसने
भारतीय कुश्ती को चर्चा में ला दिया है।
- विनेश फोगाट — पेरिस 2024 ओलंपिक से हटने के बाद
चयन विवाद को लेकर सुर्खियों में रहीं। - नेहा सांगवान — 2025 विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में
वजन और फिटनेस मानकों को पूरा न करने के कारण
अयोग्य घोषित की गईं। - अमन सहरावत — वजन सीमा पार करने पर
एक साल के लिए निलंबित।
इन घटनाओं ने कुश्ती महासंघ को
“कड़े अनुशासनात्मक प्रोटोकॉल” लागू करने पर मजबूर किया है,
ताकि खिलाड़ियों में नियमों के प्रति जागरूकता और जवाबदेही बनी रहे।
महासंघ का रुख
महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने दोहराया कि
नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे, चाहे खिलाड़ी का स्तर कुछ भी हो।
उन्होंने कहा,
“हमारे लिए अनुशासन सर्वोपरि है।
कोई भी खिलाड़ी, चाहे उसने ओलंपिक पदक जीता हो या नहीं,
अगर नियमों का उल्लंघन करेगा तो कार्रवाई की जाएगी।”
महासंघ का कहना है कि
खिलाड़ियों को न केवल शारीरिक प्रदर्शन,
बल्कि व्यावसायिक आचरण (Professional Conduct) में भी
मानक बनाए रखने होंगे।
खिलाड़ियों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं
कुश्ती समुदाय में अमन सहरावत के निलंबन की खबर ने
मिश्रित प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं।
कुछ वरिष्ठ कोचों ने इसे “जरूरी सबक” बताया है,
जबकि कुछ पूर्व पहलवानों का कहना है कि
महासंघ को खिलाड़ियों के साथ काउंसलिंग सेशन भी आयोजित करने चाहिए,
ताकि वे फिटनेस और वजन प्रबंधन के महत्व को समझ सकें।
एक पूर्व राष्ट्रीय कोच ने कहा,
“अमन एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं।
यह निलंबन उनके लिए एक चेतावनी है,
लेकिन अगर वे इस समय का सही उपयोग करें,
तो वापसी के बाद और मजबूत होकर लौट सकते हैं।”
भविष्य की राह
अमन सहरावत के निलंबन के बाद
अब महासंघ ने सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए
‘वजन और फिटनेस ट्रैकिंग सिस्टम’ लागू करने की योजना बनाई है।
इस सिस्टम के तहत खिलाड़ियों के वजन,
शारीरिक स्थिति और ट्रेनिंग रिपोर्ट्स
हर महीने महासंघ को सौंपी जाएंगी।
इससे भविष्य में वजन सीमा उल्लंघन जैसे मामले
रोकने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
अमन सहरावत का निलंबन
भारतीय कुश्ती जगत के लिए एक गंभीर संदेश है —
अनुशासन और नियमों से समझौता किसी भी कीमत पर नहीं।
हालांकि यह कदम उनके करियर के लिए
अस्थायी झटका साबित हो सकता है,
लेकिन यह भविष्य के खिलाड़ियों के लिए
पेशेवर जिम्मेदारी और अनुशासन का सबक भी है।
यदि सहरावत इस अवधि को आत्म-सुधार और तैयारी में लगाते हैं,
तो वे 2026 के बाद दोबारा
भारतीय कुश्ती की शान बन सकते हैं।
