
बेलगावी, 13 मार्च। श्री रेणुका येल्लम्मा मंदिर दान इस बार चर्चा का विषय बन गया है। कर्नाटक के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध श्री रेणुका येल्लम्मा मंदिर में दान पेटियों से कुल 3.07 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ है।
नकद के साथ सोना-चांदी की भी बड़ी मात्रा
मंदिर प्रशासन के अनुसार दान की गिनती 9 मार्च से शुरू होकर 12 मार्च तक चली।
इस दौरान प्राप्त दान में शामिल हैं:
- 2.78 करोड़ रुपये नकद
- 16.16 लाख रुपये मूल्य के 100 ग्राम सोने के आभूषण
- 12.35 लाख रुपये मूल्य के 4 किलो 547 ग्राम चांदी के आभूषण
दान की गिनती मंदिर प्रशासन की निगरानी में कर्मचारियों और छात्रों की मदद से पूरी की गई।
देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
मां रेणुका येल्लम्मा को भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की माता के रूप में पूजा जाता है।
यह मंदिर कर्नाटक के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भक्त देवी को ‘येल्लम्मा’ कहकर पुकारते हैं, जिसका अर्थ है पूरी दुनिया का पालन-पोषण करने वाली मां।
16वीं सदी में हुआ था मंदिर का निर्माण
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का निर्माण 1514 में रायबाग के राजा बोमाप्पा ने करवाया था।
मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है, जिसमें चालुक्य, राष्ट्रकूट और द्रविड़ वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है।
पवित्र जल स्रोत भी है विशेष
मंदिर परिसर में एक पवित्र जल स्रोत भी मौजूद है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसका जल शारीरिक और मानसिक विकारों को दूर करता है। कई श्रद्धालु इस जल को अपने साथ घर भी लेकर जाते हैं।
स्वयंभू मानी जाती है मां की प्रतिमा
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित देवी की प्रतिमा को स्वयंभू माना जाता है। प्रतिमा के दोनों हाथ ऊपर की ओर उठे हुए हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो मां स्वयं भक्तों को आशीर्वाद दे रही हों।
हर साल दिसंबर में यहां भव्य धार्मिक मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से शामिल होते हैं।
