
नई दिल्ली, 31 मार्च।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कैपिटल मार्केट एक्सपोजर से जुड़े संशोधित नियमों को लागू करने की समयसीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी है। अब ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे, जबकि पहले इन्हें 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाना था।
फीडबैक के बाद लिया गया फैसला
आरबीआई ने यह फैसला बैंकों, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी (CMI) और उद्योग संगठनों से मिले फीडबैक के आधार पर लिया है।
इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में ऑपरेशनल और व्यावहारिक चुनौतियों की बात कही थी, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया।
फरवरी में जारी हुआ था ड्राफ्ट
आरबीआई ने इन नियमों का ड्राफ्ट 13 फरवरी 2026 को जारी किया था और इस पर सार्वजनिक परामर्श भी किया गया था।
अधिग्रहण फाइनेंस के दायरे में बदलाव
नए नियमों के तहत अधिग्रहण फाइनेंस के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें मर्जर और अमलगमेशन (विलय) को भी शामिल किया गया है।
हालांकि यह फाइनेंस केवल उन मामलों में ही दिया जाएगा, जहां किसी गैर-वित्तीय कंपनी पर नियंत्रण हासिल करना उद्देश्य हो।
अगर लक्षित कंपनी होल्डिंग कंपनी है, तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित लाभ उसकी सभी सहायक कंपनियों (सब्सिडियरी) में भी दिखाई दे।
सहायक कंपनियों के जरिए भी मिलेगा फाइनेंस
नए ढांचे के तहत कंपनियां अब भारतीय या विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए भी अधिग्रहण फाइनेंस ले सकेंगी।
रीफाइनेंसिंग नियम हुए सख्त
आरबीआई ने अधिग्रहण लोन की रीफाइनेंसिंग के नियम भी कड़े कर दिए हैं।
अब बैंक अधिग्रहण लोन का रीफाइनेंस तभी कर सकेंगे जब:
- डील पूरी हो जाए
- कंपनी पर नियंत्रण स्थापित हो जाए
साथ ही यह राशि केवल पुराने अधिग्रहण लोन को चुकाने के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी।
अगर अधिग्रहण फाइनेंस किसी सब्सिडियरी या स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) को दिया जाता है, तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी की कॉर्पोरेट गारंटी अनिवार्य होगी।
बैंकों को तैयारी के लिए मिला समय
इस फैसले से बैंकों को अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुरूप तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
साथ ही नए नियमों में स्पष्टता आने से कानूनी विवाद और जोखिम कम होने की भी उम्मीद है।
कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी को राहत
आरबीआई ने कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी को भी कुछ राहत दी है।
अब बैंक 100 प्रतिशत नकद या नकद-जैसे कोलैटरल के बदले प्रोपरायटरी ट्रेडिंग के लिए फंडिंग दे सकेंगे।
इसके अलावा मार्केट मेकिंग गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली सिक्योरिटीज के खिलाफ फाइनेंसिंग पर लगी पाबंदियां भी हटा दी गई हैं।
