
नई दिल्ली, 31 मार्च।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से प्रभावित कर सकता है। संस्था के मुताबिक इस संकट का सबसे बड़ा असर महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने के रूप में दिखाई दे सकता है।
आईएमएफ ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष न केवल वहां के लोगों की जिंदगी और आजीविका को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी चिंता का कारण बन गया है, जो पहले से ही पिछली आर्थिक चुनौतियों से उबरने की कोशिश कर रही थीं।
सभी देशों पर असर, लेकिन अलग-अलग स्तर पर
आईएमएफ के अनुसार इस संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, हालांकि इसका प्रभाव सभी देशों पर एक जैसा नहीं है।
- ऊर्जा आयात करने वाले देश ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं
- गरीब देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ रहा है
- जिन देशों के पास कम विदेशी मुद्रा भंडार है, उनकी स्थिति और कठिन हो सकती है
होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चिंता
दुनिया के लगभग 25-30 प्रतिशत कच्चे तेल और करीब 20 प्रतिशत एलएनजी की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होती है। यह मार्ग एशिया और यूरोप के लिए बेहद अहम है।
अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो ईंधन की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ेगा।
गरीब देशों पर खाद्य संकट का खतरा
आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में खाद्य और उर्वरक की कीमतें बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
खास तौर पर गरीब देशों में खाद्य संकट का खतरा बढ़ सकता है और उन्हें बाहरी आर्थिक सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
एशिया और यूरोप में उत्पादन लागत बढ़ी
एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ रही है। इससे लोगों की खरीद क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
कुछ देशों में भुगतान संतुलन पर दबाव भी दिखाई दे रहा है, जिससे उनकी मुद्रा कमजोर पड़ सकती है।
यूरोप में यह स्थिति 2021-22 के गैस संकट जैसी परिस्थिति पैदा कर सकती है। इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में हैं।
सप्लाई चेन और व्यापार पर असर
इस युद्ध का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। जहाजों के मार्ग बदलने के कारण ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ रही है और सामान की आपूर्ति में देरी हो रही है।
खाड़ी क्षेत्र दुनिया में हीलियम की बड़ी सप्लाई करता है, जिसका उपयोग सेमीकंडक्टर और मेडिकल उपकरणों में होता है। वहीं इंडोनेशिया को निकेल प्रोसेसिंग के लिए जरूरी सल्फर की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
वित्तीय बाजारों में भी बढ़ी अस्थिरता
आईएमएफ के मुताबिक इस संघर्ष का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है।
- शेयर बाजारों में गिरावट
- बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
- बाजार में उतार-चढ़ाव
हालांकि अभी तक यह गिरावट पिछले बड़े वैश्विक संकटों की तुलना में सीमित है, लेकिन इससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो गई हैं।
देशों को सतर्क रहने की सलाह
आईएमएफ ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए देशों को संतुलित और मजबूत आर्थिक नीतियां अपनानी होंगी, खासकर उन देशों को जिनके पास सीमित संसाधन हैं।
आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा,
“अनिश्चित दुनिया में ज्यादा देशों को हमारे समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ हैं।”
