
मुंबई, 31 मार्च।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में कथित ‘पंप-एंड-डंप’ पैटर्न के संकेत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है।
बाजार नियामक के अनुसार कंपनी के शेयर की कीमत कम समय में 60 गुना से ज्यादा बढ़ी, जिसके बाद उसमें अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई। इस तरह का पैटर्न आमतौर पर हेरफेरपूर्ण ट्रेडिंग का संकेत माना जाता है।
समन्वित सौदों से बढ़ी कीमतें
सेबी की शुरुआती जांच में पाया गया कि कंपनी के प्रमोटरों और उनसे जुड़े पक्षों के बीच समन्वित सौदे और फंड ट्रांसफर हुए, जिससे शेयरों की कीमतों में असामान्य तेजी आई।
राजस्व में भी असामान्य उछाल
नियामक ने कंपनी की आय में भी असामान्य बढ़ोतरी पर चिंता जताई है।
सेबी के मुताबिक, कंपनी का राजस्व दो साल में लगभग 686 गुना बढ़ गया।
- जून 2025 तिमाही: 525 करोड़ रुपये
- सितंबर 2025 तिमाही: 2,195.8 करोड़ रुपये
इस अचानक बढ़ोतरी ने जांच एजेंसियों के संदेह को और बढ़ा दिया है।
खुदरा निवेशकों को आकर्षित करने का शक
जांचकर्ताओं को संदेह है कि कंपनी की वास्तविक कारोबारी गतिविधियां बहुत सीमित थीं, लेकिन शेयर की कीमत बढ़ाने के दौरान भ्रामक कॉर्पोरेट खुलासे किए गए, जिससे खुदरा निवेशक आकर्षित हुए।
अंदरूनी लोगों पर ऊंचे दाम पर शेयर बेचने का आरोप
सेबी के अनुसार कंपनी के अंदरूनी लोगों ने ऊंची कीमतों पर शेयर बेचे।
प्रमोटर विपिन शर्मा को कथित तौर पर एक प्रमुख विक्रेता के रूप में पहचाना गया है, जिन्होंने उस समय शेयर बेचे जब ट्रेडिंग वॉल्यूम और कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर थीं।
खुलासे में चूक का भी आरोप
नियामक ने कंपनी पर खुलासे संबंधी गंभीर चूक का आरोप भी लगाया है।
कंपनी ने कथित तौर पर 408 करोड़ रुपये की जीएसटी कार्रवाई की जानकारी शेयरधारकों को समय पर नहीं दी। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण घटनाओं के खुलासे में भी देरी की गई, जिससे निवेशकों को जरूरी जानकारी नहीं मिल सकी।
जांच जारी, हो सकती है सख्त कार्रवाई
सेबी ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है, जिसमें ट्रेडिंग पैटर्न, वित्तीय स्थिति और संबंधित संस्थाओं के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद जुर्माना, बाजार में प्रतिबंध या अन्य नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।
सोमवार को बीएसई पर एलीटकॉन इंटरनेशनल का शेयर 48.38 रुपये पर बंद हुआ, जो लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
