2015 के मैगी विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! दो दुकानदारों के खिलाफ चल रहे मामले खत्म, जानें कोर्ट ने क्या कहा।

साल 2015 में मैगी नूडल्स को लेकर देशभर में मचा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दो दुकानदारों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने माना कि बाद में हुई जांच और सामने आए न्यायिक फैसलों के बाद शुरुआती आरोपों का आधार काफी कमजोर हो गया है।
क्या था 2015 का मैगी विवाद….?
2015 में मैगी नूडल्स के कुछ सैंपल की जांच के बाद इसमें तय सीमा से अधिक लेड पाए जाने का आरोप लगा था। उस समय मैगी के पैकेट पर ‘No Added MSG’ लिखे होने को लेकर भी सवाल उठे थे। विवाद बढ़ने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में मैगी के नमूने लिए गए और उनकी जांच कराई गई। इसी दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कंपनी से जुड़े लोगों और मैगी बेचने वाले कुछ दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हुई।
दुकानदारों पर क्यों हुई थी कार्रवाई….?
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान मैगी की सप्लाई चेन से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। इसके बाद कुछ दुकानदारों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई और उन्हें अदालत के सामने पेश होने के लिए समन जारी किए गए। दुकानदारों ने मामले से बाहर किए जाने की मांग की थी, लेकिन शुरुआती स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला आगे बढ़ता रहा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा हुई जांच :-
मैगी विवाद में बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सैंपल की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया। इसके लिए नमूनों को CFTRI (Central Food Technological Research Institute) भेजा गया। बाद में इस जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया गया। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के स्तर पर भी मामले की सुनवाई हुई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, NCDRC ने मैगी को असुरक्षित साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं पाए और दोबारा जांच करने वाली लैब की रिपोर्ट को भी स्वीकार किया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा….?
दिल्ली हाई कोर्ट के सामने जब दुकानदारों से जुड़े मामले आए तो अदालत ने गौर किया कि उनके खिलाफ दर्ज शिकायतें उन्हीं सैंपल से संबंधित थीं, जिन्हें मई 2015 में देशभर से इकट्ठा किया गया था। अदालत के मुताबिक, अभियोजन पक्ष के पास शुरुआती जांच रिपोर्ट के अलावा ऐसा कोई अतिरिक्त ठोस सबूत नहीं था, जो मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त हो। बाद की जांच और अदालतों के फैसलों के बाद शुरुआती रिपोर्टों का आधार भी कमजोर हो गया था।
लंबे समय तक मुकदमा चलाना उचित नहीं: “हाई कोर्ट”
हाई कोर्ट ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में आरोपियों को लंबे समय तक आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने दोनों दुकानदारों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर दिया और उन्हें राहत दी।
क्या इसका मतलब है कि मैगी को लेकर हर सवाल खत्म हो गया….?
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला खास तौर पर उन दो दुकानदारों के खिलाफ चल रहे मामलों से संबंधित है। इसे 2015 के पूरे मैगी विवाद पर एक नया सामान्य सुरक्षा प्रमाणपत्र मानना सही नहीं होगा। खाद्य पदार्थों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में उत्पाद की जांच, सैंपलिंग और लागू नियमों के आधार पर अलग-अलग कार्रवाई हो सकती है। इसलिए उपभोक्ताओं को हमेशा पैकेट पर दी गई जानकारी, एक्सपायरी डेट और खाद्य सुरक्षा संबंधी निर्देशों का ध्यान रखना चाहिए।
नोट: यह खबर उपलब्ध न्यायिक और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। अदालत के फैसले का दायरा संबंधित आरोपियों और मामले की परिस्थितियों तक सीमित है।
