
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के नाम पर विपक्षी वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की सुनियोजित कार्रवाई की जा रही है।
अखिलेश का दावा है कि 2024 में जिन सीटों पर समाजवादी पार्टी जीती थी, उन विधानसभा क्षेत्रों में करीब 50,000 वोट हटाने की तैयारी है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के साथ सीधा खिलवाड़ बताते हुए कहा कि इसी तरह की रणनीति पश्चिम बंगाल में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव करीब आते ही बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर ऐसा वातावरण बना रहे हैं, जिससे सपा का मूल वोट बैंक कमजोर हो जाए। उनका कहना है कि पहले भी मतदाता सूची से विपक्षी वोटरों के नाम हटाने की घटनाएँ सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार यह काम अधिक संगठित, योजनाबद्ध और बड़े स्तर पर किया जा रहा है।
अखिलेश बोले – “हम सतर्क हैं”
अखिलेश ने कहा कि पार्टी को अंदरूनी सूत्रों से लगातार जानकारी मिल रही है कि जिन सीटों पर सपा ने 2024 में जीत हासिल की थी, वहीं सबसे ज्यादा नाम हटाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय कर दिया गया है ताकि हर वोटर का नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहे।
अखिलेश ने कहा:
“BJP और चुनाव आयोग मिलकर तैयारी कर रहे हैं कि जिन सीटों पर समाजवादी पार्टी जीती थी, वहां के 50,000 वोट काट दिए जाएं। हम लोग सतर्क हैं और यह साजिश सफल नहीं होने देंगे। यही योजना वो पश्चिम बंगाल में भी लागू करने जा रहे हैं।”
SIR की समयसीमा बढ़ाने की मांग
अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों के लिए एक SOP (Standard Operating Procedure) जारी करनी चाहिए, जिससे यह साफ़ हो सके कि SIR के दौरान क्या करना है और क्या नहीं।
उन्होंने यूपी में SIR की समयसीमा बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि:
“चुनाव अभी दूर हैं, ऐसे में समय बढ़ाया जाना चाहिए ताकि मतदाता सूची में किसी भी नागरिक का नाम गलत तरीके से न हटे। हर विधानसभा में 50,000 वोट काटने की साजिश को हम समाजवादी पूरा नहीं होने देंगे।”
अखिलेश के इस आरोप ने यूपी की राजनीतिक गर्मी को अचानक तेज कर दिया है। अब चुनाव आयोग पर सबकी निगाहें हैं कि वह इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
