🚨 यूपी में अफसरों पर योगी सरकार की सख्ती! राजस्व मामलों के निस्तारण में खराब प्रदर्शन करने वाले 7 SDM रडार पर हैं। कुछ मामलों में निस्तारण की दर बेहद कम मिली। अब अधिकारियों से मांगा गया जवाब, संतोषजनक न होने पर होगी कार्रवाई।

जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही पर सरकार की नजर, खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण .. उत्तर प्रदेश में जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों के निपटारे में लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद राजस्व विभाग ने ऐसे अधिकारियों की निगरानी तेज कर दी है, जिनके यहां दाखिल-खारिज, वरासत, पैमाइश और राजस्व वाद लंबे समय से लंबित हैं। राजस्व परिषद ने RCCMS (राजस्व कोर्ट कंप्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम) में दर्ज आंकड़ों के आधार पर खराब प्रदर्शन करने वाले सात SDM को चिह्नित किया है। इन अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।
सरोजनीनगर SDM का प्रदर्शन सबसे कमजोर…..
समीक्षा में लखनऊ की सरोजनीनगर तहसील के SDM (न्यायिक) का प्रदर्शन सबसे खराब पाया गया। 22 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 के बीच उनके न्यायालय में 221 मामले दर्ज हुए, लेकिन सिर्फ 9 मामलों का निस्तारण हो सका। इस तरह मामलों के निस्तारण की दर महज 4.07 फीसदी रही। वहीं लखनऊ सदर तहसील के SDM के न्यायालय में इसी अवधि के दौरान 1,000 मामले आए, जिनमें 403 मामलों का निस्तारण हुआ। यहां निस्तारण की दर 40.30 फीसदी रही।
मऊ और प्रतापगढ़ के अधिकारी भी निगरानी में….
राजस्व परिषद की समीक्षा सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रही। मऊ और प्रतापगढ़ की कुछ तहसीलों में भी मामलों के निस्तारण की स्थिति को लेकर अधिकारियों को चिह्नित किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक :—
- मधुबन, मऊ: 276 में से 55 मामलों का निस्तारण
- कुंडा, प्रतापगढ़: 297 में से 80 मामलों का निस्तारण
- रानीगंज, प्रतापगढ़: 418 में से 133 मामलों का निस्तारण
- रानीगंज के SDM: 558 में से 183 मामलों का निस्तारण
- कुंडा की SDM: 1,247 में से 511 मामलों का निस्तारण
इन आंकड़ों के आधार पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
पहले ही कई तहसीलदारों पर हो चुकी है कार्रवाई…..
राजस्व मामलों में लापरवाही के खिलाफ सरकार पहले ही कार्रवाई शुरू कर चुकी है। पिछले एक सप्ताह में 10 तहसीलदार और नायब तहसीलदार निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मंगलवार को भी पांच अधिकारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई। इससे पहले 1 सितंबर को चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था।
23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचेगी रिपोर्ट…..
राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों से चिह्नित अधिकारियों का लिखित स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। पूरी रिपोर्ट 23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जानी है।
सीएम योगी के निर्देश के बाद बढ़ी निगरानी…..
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अगस्त 2026 को राजस्व अदालतों में लंबित मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को राजस्व मामलों का निर्धारित समयसीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। अब RCCMS के आंकड़ों के जरिए अधिकारियों के कामकाज की निगरानी की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में खराब प्रदर्शन करने वाले अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जमीन के मामलों में तेजी लाने पर जोर…..
राजस्व मामलों का सीधा असर आम लोगों की जमीन, विरासत और संपत्ति से जुड़े अधिकारों पर पड़ता है। ऐसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से लोगों को सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सरकार की मौजूदा कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे मामलों के निस्तारण में तेजी लाना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है।
