प्रस्तावना

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े खतरे केवल इंसानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पशुओं, पौधों और पर्यावरण तक फैले हुए हैं। बीते कुछ वर्षों में महामारी, ज़ूनोटिक बीमारियाँ (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियाँ), पर्यावरण प्रदूषण और नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ सामने आई हैं। ऐसे परिदृश्य में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया है।
राष्ट्रीय “एक स्वास्थ्य मिशन” (National One Health Mission – NOHM) इसी सोच का परिणाम है, जो मानव, पशु, पादप और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर काम करता है।
राष्ट्रीय एक स्वास्थ्य मिशन (NOHM) की भूमिका
मिशन का महत्व
- यह मिशन महामारी जैसी वैश्विक आपदाओं से निपटने की तैयारी करता है।
- इसमें रोग निगरानी, त्वरित पहचान और समय पर प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
- मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पशु और पौधों की सुरक्षा भी इसके दायरे में है।
समिति की बैठक
- हाल ही में आयोजित दूसरी कार्यकारी संचालन समिति बैठक में जेपी नड्डा ने मिशन की प्रगति की समीक्षा की।
- उन्होंने राज्य अधिकारियों और केंद्रीय विभागों को और मजबूती से साथ मिलकर काम करने की अपील की।
जेपी नड्डा की प्रमुख बातें
स्वास्थ्य खतरों के प्रति तैयारी
जेपी नड्डा ने कहा कि:
- भविष्य में आने वाले स्वास्थ्य खतरों का बेहतर पूर्वानुमान,
- उनका समय पर रोकथाम,
- और प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता भारत को विकसित करनी होगी।
विभागीय सहयोग
- उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास ही इस मिशन को सफल बना सकते हैं।
- उदाहरण के लिए: पशुपालन, कृषि, पर्यावरण, जल प्रबंधन और शहरी विकास से जुड़े मंत्रालयों का सहयोग आवश्यक है।
राज्यों की भूमिका
- राज्य स्तर पर कार्यान्वयन की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है।
- नड्डा ने राज्यों से आग्रह किया कि वे इस मिशन को अपनी प्राथमिकता बनाएं और स्थानीय स्तर पर तंत्र को मजबूत करें।
विशेषज्ञों के विचार
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय सूद
- उन्होंने कहा कि मिशन का मुख्य उद्देश्य महामारी से निपटने की तैयारी बढ़ाना है।
- उन्होंने यह भी बताया कि रोगों का समय पर पता लगाने के लिए स्थानीय सहभागिता और स्वामित्व बेहद महत्वपूर्ण है।
नीति आयोग के सदस्य वी.के. पॉल
- उन्होंने सुझाव दिया कि सभी विभाग मिलकर रोग प्रबंधन में मौजूद कमियों की पहचान करें और उन पर काम करें।
- नए खतरों जैसे:
- वन्यजीव निगरानी,
- अपशिष्ट जल की निगरानी,
- और जैव सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
आईसीएमआर महानिदेशक राजीव बहल
- उन्होंने पहली बैठक (जुलाई 2024) से अब तक हुई प्रगति की जानकारी दी।
- इसमें BSL-3 प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को मजबूत करना,
- विष्णु युद्ध अभ्यास मॉक ड्रिल,
- और सिंड्रोमिक निगरानी परियोजनाएं शामिल हैं।
उल्लेखनीय उपलब्धियाँ
प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

- पूरे देश में BSL-3 स्तर की प्रयोगशालाओं का विस्तार किया गया।
- इन प्रयोगशालाओं में खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया पर शोध और परीक्षण संभव है।
मॉक ड्रिल और अभ्यास
- अगस्त 2024 में “विष्णु युद्ध अभ्यास” आयोजित किया गया।
- यह एक मल्टी-डिपार्टमेंटल मॉक ड्रिल थी जिसमें महामारी जैसी स्थितियों से निपटने का अभ्यास हुआ।
निगरानी परियोजनाएँ
- रोगों का पता लगाने के लिए “सिंड्रोमिक सर्विलांस प्रोजेक्ट” शुरू किया गया।
- इसमें इंसानों के साथ-साथ पशुओं और पर्यावरण की स्वास्थ्य निगरानी शामिल है।
एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण क्यों ज़रूरी?
महामारी और वैश्विक खतरे
- कोविड-19 महामारी ने दिखाया कि स्वास्थ्य खतरे केवल चिकित्सा प्रणाली तक सीमित नहीं हैं।
- वुहान से फैला वायरस कैसे पूरी दुनिया में फैल गया, यह इस बात का उदाहरण है।
ज़ूनोटिक बीमारियों का खतरा
- 60% से अधिक नई बीमारियाँ जानवरों से इंसानों में फैलती हैं।
- जैसे: बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, निपाह वायरस।
पर्यावरणीय कारक
- प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई नई बीमारियों के लिए रास्ता खोलते हैं।
- इसीलिए पर्यावरण मंत्रालय की भूमिका भी अहम है।
भविष्य की रणनीति
SOP और रोडमैप
- एकीकृत स्वास्थ्य मिशन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) तैयार की जा रही हैं।
- स्पष्ट रोडमैप और मार्गदर्शन राज्यों को दिए जा रहे हैं।
सहयोगात्मक दृष्टिकोण
- अब तक 16 मंत्रालय और विभाग इस मिशन का हिस्सा बन चुके हैं।
- यह सहयोग दिखाता है कि भारत समग्र दृष्टिकोण से काम कर रहा है।
सतत विकास और स्वास्थ्य
- यह मिशन केवल बीमारी से निपटने का नहीं बल्कि सतत विकास को आगे बढ़ाने का भी प्रयास है।
- स्वस्थ पर्यावरण, स्वस्थ पशु और स्वस्थ इंसान — यही मिशन का उद्देश्य है।
निष्कर्ष
जेपी नड्डा का यह आह्वान भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। महामारी से लेकर पर्यावरणीय संकट तक, हर चुनौती के समाधान के लिए “एक स्वास्थ्य मिशन” की सोच बेहद आवश्यक है।
यदि केंद्र और राज्य मिलकर समन्वित ढंग से काम करें, तो भारत न केवल अपने नागरिकों बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को स्वास्थ्य खतरों से सुरक्षित रखने में सक्षम होगा।
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