बांग्लादेश में शेख हसीना के 7 करीबियों को फांसी की सजा! ⚖️ जानें 2024 के हिंसक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामले में क्या हैं आरोप।

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से जुड़े सात वरिष्ठ नेताओं को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला साल 2024 में हुए छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में सुनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता जस्टिस मोहम्मद नजरुल इस्लाम चौधरी ने की। अदालत ने सातों नेताओं को हिंसा से जुड़े गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया।
किन नेताओं को सुनाई गई मौत की सजा…..?
मौत की सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल कादर शामिल हैं। उनके अलावा पार्टी के संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात को भी सजा सुनाई गई है। इसके अलावा जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फजले शम्स पराश, महासचिव मैनुअल हुसैन खान निखिल, बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ एनन को भी मौत की सजा दी गई है।
नेताओं पर क्या आरोप लगाए गए…..?
ट्रिब्यूनल के सामने अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने कथित तौर पर बैठकें कीं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े फैसलों में भूमिका निभाई। उन पर भड़काऊ और उकसाने वाले बयान देने तथा विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसा की योजना बनाने के आरोप भी लगाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इन नेताओं पर अलग-अलग स्थानों पर सशस्त्र हमलों, गंभीर दमन और मीडिया को नियंत्रित करने के प्रयासों में कथित भूमिका का आरोप लगाया गया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि इन गतिविधियों के कारण कई जगहों पर हत्या, हत्या के प्रयास और व्यापक हिंसा की स्थिति बनी।
2024 के विरोध प्रदर्शनों में क्या हुआ था…..?
बांग्लादेश में साल 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों ने बड़ा राजनीतिक संकट पैदा कर दिया था। प्रदर्शन धीरे-धीरे व्यापक आंदोलन में बदल गए और सरकार के खिलाफ भारी विरोध देखने को मिला। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर चली गई थीं। इसके बाद देश में राजनीतिक सत्ता का बड़ा बदलाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना फिलहाल भारत में रह रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुमान के अनुसार, 15 जुलाई से 5 अगस्त 2024 के बीच विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी।
शेख हसीना को भी सुनाई जा चुकी है मौत की सजा…..
यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश के इस ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना के खिलाफ मौत की सजा का फैसला सुनाया है। नवंबर 2025 में ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को ‘सुपीरियर कमांड रिस्पॉन्सिबिलिटी’ के सिद्धांत के तहत जिम्मेदार माना था। अदालत के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी।
बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव…..
सात वरिष्ठ नेताओं को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में इस फैसले का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामला 2024 के हिंसक विरोध प्रदर्शनों और तत्कालीन सरकार की कार्रवाई से जुड़ा है, जिसने देश की राजनीतिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया था। इस मामले में अदालत के फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर अब बांग्लादेश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी।
