
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आचारण न्यूज़)।
धनतेरस का त्योहार दीपावली की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है — यानी दीवाली से दो दिन पहले। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है।
🪔 क्यों मनाई जाती है धनतेरस?
धनतेरस शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — ‘धन’ यानी संपत्ति और ‘तेरस’ यानी त्रयोदशी तिथि।
पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है।
वहीं, दूसरी मान्यता के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपने भक्तों को समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
इस दिन सोना-चांदी, तांबे या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह आने वाले साल में धनवृद्धि का प्रतीक होता है।
🕯️ धनतेरस पूजा की विधि
धनतेरस की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है — जब सूर्य अस्त हो चुका होता है।
पूजा की प्रक्रिया इस प्रकार है 👇
- घर की सफाई कर लें और दरवाज़े पर रंगोली बनाएं।
- मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- दीया जलाएं और भगवान गणेश का स्मरण करें।
- धूप, दीप, फूल, फल और मिठाई से मां लक्ष्मी की पूजा करें।
- भगवान धन्वंतरि की आराधना करें और स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद माँगें।
- पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाना न भूलें — यह समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक है।
⏰ आज का शुभ मुहूर्त (17 अक्टूबर 2025)
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:45 बजे से रात 8:25 बजे तक 🪔
- प्रदोष काल: शाम 6:40 बजे से रात 8:50 बजे तक
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 17 अक्टूबर को सुबह 8:10 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 18 अक्टूबर को सुबह 6:45 बजे
👉 इस समय के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा करना सबसे शुभ माना गया है।
🌸 धनतेरस की खासियत
- इस दिन दीप जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- धातु (सोना, चांदी, तांबा) की वस्तु खरीदना शुभ रहता है।
- स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा विशेष महत्व रखती है।
- यह दिन दीपावली की शुरुआत का प्रतीक है, इसलिए इसे “यम दीपदान तिथि” भी कहा जाता है।
🌟 संक्षेप में
धनतेरस हमें सिखाता है कि सच्चा “धन” सिर्फ पैसा नहीं बल्कि स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि है।
मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की कृपा से जीवन में खुशहाली, सेहत और सौभाग्य बना रहे — यही इस पर्व का असली संदेश है। 🙏
