त्योहारों से पहले चीनी हुई सस्ती! 🍬📉 22 दिनों में कई शहरों में 16 रुपये तक गिरा भाव, जानें अब कितने रुपये किलो मिल रही है चीनी।

त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। देश के कई शहरों में चीनी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 22 अगस्त से 12 सितंबर के बीच कुछ प्रमुख बाजारों में चीनी के दाम 12 से 16 रुपये प्रति किलो तक कम हुए हैं। अगस्त में जहां कुछ जगहों पर चीनी की कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, वहीं अब कई बाजारों में इसके दाम तेजी से नीचे आए हैं। कीमतों में इस गिरावट से त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ बनाने वाले कारोबारियों के साथ-साथ घरेलू उपभोक्ताओं को भी राहत मिल सकती है।
कानपुर में 16 रुपये तक सस्ती हुई चीनी…..
चीनी की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट कानपुर में दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 22 अगस्त के आसपास यहां चीनी का भाव करीब 69 रुपये प्रति किलो था। अब यह घटकर लगभग 53 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। यानी महज 22 दिनों में चीनी करीब 16 रुपये प्रति किलो सस्ती हुई है। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब देश में त्योहारों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है।
रांची में भी घटे दाम…..
रांची में भी चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है। यहां अगस्त के अंत में चीनी का भाव करीब 70 रुपये प्रति किलो के आसपास था, जो अब घटकर लगभग 55 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। इस तरह रांची के बाजार में भी करीब 15 रुपये प्रति किलो की गिरावट देखने को मिली है। वहीं कोलकाता और गुवाहाटी में भी चीनी के दाम में लगभग 15 रुपये तक की कमी दर्ज की गई है।
सरकार के नए नियमों का दिख रहा असर…..
चीनी की कीमतों में अचानक आई गिरावट के पीछे सरकार के हालिया नियमों को एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। सरकार ने चीनी डीलरों और कारोबारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा को कम कर दिया है। पहले डीलरों को अधिकतम 4,000 क्विंटल तक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति थी। अब यह सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई है। इसके अलावा मिल से चीनी प्राप्त करने के बाद उसे निर्धारित समय के भीतर बाजार में बेचने का नियम भी लागू किया गया है। नए नियमों के मुताबिक, डीलर या व्यापारी मिल से स्टॉक मिलने के बाद उसे अधिकतम 30 दिनों के भीतर बाजार में उतारेंगे। इससे कारोबारियों के लिए लंबे समय तक बड़ी मात्रा में चीनी का स्टॉक रोककर रखना मुश्किल हो गया है।
थोक खरीदारों के लिए भी स्टॉक लिमिट…..
सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक रखने की अवधि को सीमित किया है। उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक सीमित मात्रा में ही चीनी रखने की अनुमति है। नियमों के तहत थोक उपभोक्ताओं को करीब 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रखने की व्यवस्था की गई है। अतिरिक्त स्टॉक को बाजार में उतारना होगा। इसका सीधा असर बाजार में चीनी की उपलब्धता पर पड़ा है।
13 लाख टन चीनी बाजार में आने से बढ़ी सप्लाई…..
चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ने की एक और बड़ी वजह सरकार की ओर से तय किया गया बाजार रिलीज कोटा है। रिपोर्ट के अनुसार, 587 चीनी मिलों और दो रिफाइनरियों के लिए करीब 13 लाख टन चीनी का कोटा निर्धारित किया गया है। इस स्टॉक को तय समय के भीतर बाजार में उतारने की वजह से थोक सप्लाई अचानक बढ़ गई। जब बाजार में किसी वस्तु की उपलब्धता बढ़ती है और कारोबारी अपना स्टॉक तेजी से बेचने लगते हैं, तो कीमतों पर भी दबाव आता है। यही स्थिति फिलहाल चीनी बाजार में दिखाई दे रही है।
त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं को राहत…..
चीनी की कीमतों में यह गिरावट त्योहारों से ठीक पहले आई है। भारत में त्योहारी सीजन के दौरान मिठाइयों, घर की बनी मिठाई और कई तरह के पकवानों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में कमी से घरेलू बजट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। मिठाई और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों को भी कच्चे माल की लागत कम होने से राहत मिल सकती है। चीनी के खुदरा दाम आगे किस दिशा में जाएंगे, यह बाजार में सप्लाई, मांग और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा।
अभी कितना है चीनी का भाव…..?
22 अगस्त और 12 सितंबर के बीच सामने आए आंकड़ों के मुताबिक प्रमुख शहरों में चीनी की कीमतों में इस तरह गिरावट दर्ज की गई है:-
- कानपुर: करीब 69 रुपये से घटकर 53 रुपये प्रति किलो
- रांची: करीब 70 रुपये से घटकर 55 रुपये प्रति किलो
- कोलकाता: लगभग 15 रुपये प्रति किलो तक गिरावट
- गुवाहाटी: लगभग 15 रुपये प्रति किलो तक गिरावट
इस तरह कुछ बाजारों में महज 22 दिनों के भीतर चीनी 16 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हुई है।
आगे क्या होगा….?
सरकार की स्टॉक लिमिट और बाजार में तय मात्रा में चीनी उतारने की व्यवस्था का असर फिलहाल कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। अगर बाजार में सप्लाई इसी तरह बनी रहती है तो आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।
