Skip to content
Bazaart_20250620_024615_864 (1)

हर कदम आपके साथ

Primary Menu
  • HOME
  • NATIONAL
  • INTERNATIONAL
  • SPORTS
  • TRENDING
  • TECHNOLOGY
  • BUSINESS
  • ASTROLOGY
  • STATE
  • ENTERTAINMENT
  • VIDEO
  • Home
  • News
  • Cauvery Water Dispute: तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच क्या है कावेरी जल विवाद, क्यों लड़ रहे दोनों राज्य?
  • general knowledge
  • News

Cauvery Water Dispute: तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच क्या है कावेरी जल विवाद, क्यों लड़ रहे दोनों राज्य?

Mazid Qureshi August 18, 2026 1 minute read

कावेरी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच आखिर क्यों है दशकों पुराना विवाद?

📰 Latest Posts

  • “छत्तीसगढ़ में Gen Z का नेता कौन”? मोदी या राहुल गांधी पर युवाओं ने दिया चौंकाने वाला जवाब……
  • “राहुल वैद्य-दिशा परमार” का आलीशान आशियाना, छत पर बना है स्विमिंग पूल; फराह खान ने कराया होम टूर…….
  • “UPI Charge” पर अशनीर ग्रोवर का सवाल, बोले- बड़े ट्रांजैक्शन फ्री तो छोटे दुकानदारों से चार्ज क्यों….?
  • “सुरभि चंदना” के घर गणपति भोग से पहले गैस लीकेज, परिवार ने ऐसे संभाली स्थिति……
  • Oracle Layoff : सुबह 6 बजे ईमेल से गई नौकरी, कर्मचारियों को बताया- आज है आखिरी वर्किंग डे……
  • “DU में बैक लगने पर डिग्री नहीं होगी रद्द, जानें बैकलॉग क्लियर करने की पूरी समय सीमा”……
  • “ऋतिक रोशन ने भांजी सुरानिका के 30वें बर्थडे पर लुटाया प्यार, शेयर कीं बचपन की तस्वीरें”…….
  • “पाकिस्तानी हिंदू ने परिवार संग राम मंदिर दर्शन की जताई इच्छा, पोस्ट हुई वायरल”; यूजर्स बोले- “राम सभी के हैं”
  • “अंबानी के गणेशोत्सव” में पहुंचीं मैथिली ठाकुर, ईशा अंबानी से हुई खास मुलाकात; फैंस बोले- बिहार के लिए गर्व की बात……
  • “असम की नागांव सीट पर कांग्रेस ने सिबामोनी बोरा को दिया टिकट, पूर्व CM की बहू लड़ेंगी उपचुनाव”……
  • “मसूद अजहर” पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, भारत ने कहा- सिर्फ घोषणाओं से नहीं होगी आतंकवाद पर कार्रवाई…..
  • “शेयर बाजार पर मंडरा रहा बड़ा खतरा” ! चीन की तेल खरीदारी बढ़ी तो क्यों बढ़ सकती है मुश्किल ?……..
  • ‘जब जिद पे आ गई पार्वती’ पर नन्हीं बच्ची का प्यारा डांस वायरल, एक्सप्रेशंस ने जीता दिल…..
  • तेल, प्याज से लेकर गैस तक क्यों बढ़ रही महंगाई ? जानें किचन का बजट बिगड़ने की बड़ी वजहें…..
  • “नाना पाटेकर-मनीषा कोइराला” के अफेयर की खबरों पर राइटर का रिएक्शन, बोले- दोनों के बीच कुछ तो था……

दक्षिण भारत की कावेरी नदी सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि कर्नाटक और तमिलनाडु के करोड़ों लोगों की जिंदगी, खेती और अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि कावेरी के पानी का बंटवारा लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है.

जब मानसून सामान्य रहता है तो पानी को लेकर तनाव अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है. लेकिन बारिश कम होने पर कर्नाटक के जलाशयों में पानी का स्तर घटता है और तमिलनाडु अपने हिस्से का पानी छोड़ने की मांग करता है. इसी परिस्थिति में विवाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर तेज हो जाता है.

कावेरी जल विवाद कई बार जल विवाद न्यायाधिकरण से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह विवाद शुरू कैसे हुआ और आज दोनों राज्यों के बीच मुख्य मतभेद क्या हैं.

कावेरी नदी कहां से निकलती है?

कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक के कोडागु क्षेत्र में माना जाता है. यह कर्नाटक से होकर तमिलनाडु में प्रवेश करती है और आगे कई धाराओं में बंटते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है. इस भौगोलिक स्थिति के कारण कर्नाटक ऊपरी तटवर्ती राज्य (Upper Riparian State) और तमिलनाडु निचला तटवर्ती राज्य (Lower Riparian State) है. कर्नाटक में कावेरी के ऊपरी हिस्से पर कई जलाशय और बांध हैं. वहीं तमिलनाडु में कावेरी का पानी विशेष रूप से कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

यहीं से दोनों राज्यों की जरूरतों के बीच टकराव पैदा होता है.

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच असली विवाद क्या है?

सीधे शब्दों में कहें तो विवाद का मुख्य सवाल है—कावेरी का पानी कितना और किस अनुपात में दोनों राज्यों को मिलना चाहिए?

तमिलनाडु का कहना है कि कावेरी डेल्टा की कृषि नदी के पानी पर काफी निर्भर है. धान जैसी फसलों के लिए खेती के विशेष समय पर पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. इसलिए राज्य चाहता है कि निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कर्नाटक से पानी छोड़ा जाए.

दूसरी तरफ कर्नाटक का तर्क है कि बारिश हर साल एक जैसी नहीं होती. कम बारिश वाले वर्षों में उसके अपने जलाशयों में पानी कम रहता है. ऐसे समय में राज्य को किसानों के साथ-साथ बेंगलुरु और अन्य शहरों की पेयजल जरूरतें भी पूरी करनी होती हैं.

इसलिए कर्नाटक चाहता है कि पानी छोड़ने का फैसला वास्तविक वर्षा, जलाशयों में उपलब्ध पानी और दोनों राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए.

कावेरी विवाद कितना पुराना है?

कावेरी जल विवाद की जड़ें ब्रिटिश शासन के दौर तक जाती हैं. 1892 और 1924 में तत्कालीन मैसूर रियासत और मद्रास प्रेसीडेंसी के बीच कावेरी के पानी और सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण समझौते हुए थे.

1924 का समझौता विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा. इसके तहत दोनों क्षेत्रों में सिंचाई और जल उपयोग को लेकर व्यवस्था तय की गई.

आजादी के बाद राज्यों की सीमाएं बदलीं और मैसूर आगे चलकर कर्नाटक बना, जबकि मद्रास प्रेसीडेंसी का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु के रूप में सामने आया. इसके बाद पुराने समझौतों की वैधता और न्यायसंगतता को लेकर मतभेद सामने आने लगे.

कर्नाटक ने समय के साथ पुराने समझौतों को अपने लिए असमान बताया, जबकि तमिलनाडु ने ऐतिहासिक उपयोग और अपने कृषि हितों के आधार पर पानी पर दावा जारी रखा.

1990 में बना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण

लगातार बढ़ते विवाद को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1990 में कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (Cauvery Water Disputes Tribunal) का गठन किया. कई वर्षों तक सुनवाई और आंकड़ों के अध्ययन के बाद न्यायाधिकरण ने 2007 में अपना अंतिम फैसला दिया. न्यायाधिकरण ने कावेरी के उपलब्ध जल का बंटवारा कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बीच निर्धारित किया. मूल अंतिम आवंटन में तमिलनाडु को लगभग 419 टीएमसी और कर्नाटक को लगभग 270 टीएमसी पानी दिया गया, जबकि शेष हिस्सा केरल और पुडुचेरी के लिए निर्धारित किया गया.

हालांकि दोनों प्रमुख राज्यों ने फैसले के अलग-अलग हिस्सों पर आपत्ति जताई और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में क्या फैसला दिया?

कावेरी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आवंटन में बदलाव करते हुए कर्नाटक के हिस्से में 14.75 टीएमसी की बढ़ोतरी की. इसका एक प्रमुख कारण बेंगलुरु की पेयजल जरूरत को ध्यान में रखना था. इसके बाद अंतरराज्यीय सीमा पर बिलिगुंडलू बिंदु पर तमिलनाडु के लिए कर्नाटक द्वारा छोड़े जाने वाले पानी की वार्षिक मात्रा 177.25 टीएमसी निर्धारित हुई.

यह फैसला दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर कानूनी ढांचे का एक महत्वपूर्ण आधार बना.

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कावेरी जल विवाद के कार्यान्वयन के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया गया.

Cauvery Water Management Authority (CWMA) और संबंधित नियामक व्यवस्था का उद्देश्य राज्यों के बीच निर्धारित जल बंटवारे को लागू करना और नदी के जल संसाधनों की स्थिति के आधार पर आवश्यक निर्णय लेना है.

जब बारिश कम होती है और जलाशयों में पानी का स्तर घटता है, तब पानी छोड़ने को लेकर राज्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है. ऐसे समय में संबंधित संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है.

मेकेदातु परियोजना क्या है?

कावेरी विवाद में मेकेदातु (Mekedatu) परियोजना एक और बड़ा मुद्दा है.

कर्नाटक कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक संतुलन जलाशय बनाने की योजना का समर्थन करता रहा है. राज्य का कहना है कि इससे बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा परियोजना से बिजली उत्पादन की भी योजना जुड़ी हुई है.

लेकिन तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध करता है.

तमिलनाडु की मुख्य चिंता यह है कि कर्नाटक में नया जलाशय बनने से कावेरी के पानी के प्रवाह पर उसका नियंत्रण बढ़ सकता है और इससे तमिलनाडु तक पहुंचने वाले पानी पर असर पड़ सकता है.

यही वजह है कि मेकेदातु परियोजना लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बनी हुई है.

बारिश कम होते ही विवाद क्यों बढ़ जाता है?

कावेरी विवाद की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नदी में हर साल पानी की मात्रा एक जैसी नहीं रहती. अगर मानसून अच्छा रहता है तो जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हो सकता है और दोनों राज्यों की जरूरतों को पूरा करना आसान हो जाता है.

लेकिन सूखे या कम बारिश वाले साल में स्थिति बदल जाती है. कर्नाटक के जलाशयों में पानी कम हो जाता है, जबकि तमिलनाडु को अपनी कृषि जरूरतों के लिए निर्धारित मात्रा में पानी चाहिए होता है.

यहीं से दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ता है.

कर्नाटक का कहना होता है कि उपलब्ध पानी सीमित है और पहले राज्य की पेयजल जरूरतों को भी ध्यान में रखना होगा. वहीं तमिलनाडु निर्धारित हिस्से के अनुसार पानी छोड़ने की मांग करता है.

क्या यह सिर्फ किसानों का विवाद है?

कावेरी जल विवाद का असर किसानों के अलावा शहरों और आम लोगों पर भी पड़ता है. तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा की कृषि नदी पर काफी निर्भर है. वहीं कर्नाटक के लिए कावेरी बेसिन के साथ-साथ बेंगलुरु की पेयजल जरूरतें भी महत्वपूर्ण हैं.

इसलिए यह विवाद केवल दो सरकारों के बीच पानी बांटने का मामला नहीं है. इसके पीछे कृषि, पेयजल, शहरीकरण, जल संरक्षण और बदलते मौसम जैसे कई मुद्दे जुड़े हैं.

क्या कावेरी जल विवाद का स्थायी समाधान संभव है?

कावेरी विवाद का स्थायी समाधान आसान नहीं है, क्योंकि नदी का पानी सीमित है और उसकी उपलब्धता मानसून पर काफी निर्भर करती है. इसके लिए दोनों राज्यों को जलाशयों के आंकड़ों, बारिश, नदी के प्रवाह और वास्तविक जरूरतों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से योजना बनानी होगी. इसके साथ ही जल संरक्षण, माइक्रो इरिगेशन, फसल पैटर्न में बदलाव और भूजल प्रबंधन जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं. अगर पानी की कुल मांग कम की जाए और उपलब्ध संसाधन का बेहतर इस्तेमाल हो, तो विवाद की तीव्रता को कम किया जा सकता है.

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और ऐतिहासिक संदर्भ के उद्देश्य से तैयार किया गया है. कावेरी जल बंटवारे, जलाशय स्तर और संबंधित कानूनी मामलों की स्थिति समय के साथ बदल सकती है. नवीनतम निर्णयों और आधिकारिक आंकड़ों के लिए संबंधित सरकारी एवं न्यायिक स्रोतों को प्राथमिकता दें.

🎯 Random Posts

  • Chhatrapati Sambhajinagar: टीसी को लेकर विवाद के बाद नाबालिग छात्र ने शिक्षक पर किया चाकू से हमला, हालत गंभीर
  • भारत की जीडीपी ग्रोथ 2025-26: 6.5% पर स्थिर रहने का अनुमान, एसएंडपी ग्लोबल की रिपोर्ट – New Breaking News
  • कलेक्टर नहीं मिले तो कुत्ते को सौंपा ज्ञापन, गले में बांध दिया पर्चा; छिंदवाड़ा में कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन
  • No Image
    माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल साउथ में एआई को बढ़ावा देने के लिए करेगा 50 अरब डॉलर का निवेश
  • “शेयर बाजार पर मंडरा रहा बड़ा खतरा” ! चीन की तेल खरीदारी बढ़ी तो क्यों बढ़ सकती है मुश्किल ?……..
  • No Image
    टी20 विश्व कप: लॉर्कन टकर ने रोहित शर्मा को पछाड़ा, अपने नाम किया बड़ा रिकॉर्ड
  • अमेरिका में 7200 रुपये प्रति किलो मिल रही भिंडी? न्यूट्रिशन से भरपूर भारत की मामूली सब्जी वहां क्यों बनी ‘लग्जरी फूड’
  • “नाना पाटेकर-मनीषा कोइराला” के अफेयर की खबरों पर राइटर का रिएक्शन, बोले- दोनों के बीच कुछ तो था……
  • गांव में लगाएं RO वाटर प्लांट, साफ पानी की बढ़ती मांग से शुरू करें कमाई का बिजनेस…..
  • भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच रुपया मजबूत, दो सप्ताह बाद 88 के नीचे खुला – New Breaking Record
  • दशहरा 2026 पर बॉक्स ऑफिस का बड़ा मुकाबला, रजनीकांत की ‘जेलर 2’ से भिड़ेगी विजय देवरकोंडा की ‘राणाबाली’….
  • फरक्का पर किसका है हक? क्यों बिहार को हो रहा नुकसान, जानिए पूरा मामला
  • Maggi Case: 2 मिनट में बनने वाली मैगी के 2015 विवाद में बड़ा फैसला, दिल्ली हाई कोर्ट ने दुकानदारों को दी राहत…..
  • रियल एस्टेट में सचिन तेंदुलकर का “चौका”, लोनावला में 70 करोड़ की खरीदी जमीन……
  • “अब 12 महीने बिकेंगे सर्दी-गर्मी वाले सामान, FMCG कंपनियां बदल रही हैं रणनीति”……
Share

Post navigation

Previous: “आंध्र प्रदेश की कमाई का 95% सैलरी और पेंशन पर खर्च, बढ़ता कर्ज बना बड़ी चुनौती…….”
Next: Bathroom Tiles Cleaning Tips: बाथरूम की टाइल्स काली पड़ रही हैं? ऐसे हटाएं जमी गंदगी, चमक उठेगा फर्श
Copyright @ Acharan news | MoreNews by AF themes.
Privacy Policy Disclaimer Terms & Conditions About Us
Copyright © Acharan News | All Rights Reserved