ग्वालियर की सड़कों के गड्ढों पर हाईकोर्ट सख्त! नगर निगम की कार्यशैली पर अदालत ने जताई नाराजगी और कहा—अच्छी सड़कें देने को लेकर निगम गंभीर नहीं दिखता।

इन दिनों तानसेन की धरती संगीत नहीं, बल्कि गाड़ी चलाने वालों की चीखें पैदा कर रही हैं। गड्ढे इतने कि सड़क ढूंढनी पड़े, और धूल इतनी कि शहर का हुस्न ही धुंधला जाए। जनता परेशान थी, सो मामला पहुंचा लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर यानी माननीय हाईकोर्ट की चौखट पर।
न्याय की कुर्सी पर बैठे थे जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला। सामने फाइलें खुलीं तो पता चला कि नगर निगम शहर के 120 ठिकानों पर फैले करीब साढ़े बारह हजार वर्ग मीटर के सड़कों के जख्मों को भरने की इजाजत मांगने आया है।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब अदालत ने निगम की फाइलों के पन्ने पलटने शुरू किए।
जैसे ही नए निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी की फाइल सामने आई, माननीय जजों के सब्र का बांध टूट गया। कोर्ट रूम में गूंजी वो टिप्पणी, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। अदालत ने सीधे शब्दों में कहा— नए कमिश्नर तो पुराने वाले से भी एक कदम आगे निकले!
आखिर जज साहब इतने नाराज क्यों थे? क्योंकि कोर्ट के अनुसार निगम के अधिकारी अपना काम करने के बजाय, जिम्मेदारी का सारा बोझ कोर्ट के कंधों पर डालना चाहते हैं। वो चाहते थे कि कोर्ट बजट और एस्टीमेट पर अपनी मुहर लगा दे, ताकि कल को अगर सड़कों की क्वालिटी पर सवाल उठे, तो अधिकारी कह सकें— हुजूर, हम क्या करें? मंजूरी तो कोर्ट ने ही दी थी!
लेकिन लगता है अदालत भी दूध की जली थी। कोर्ट ने साफ कह दिया— हम आपकी मनपसंद प्राइवेट एजेंसी मैसर्स ग्राम इंफ्राटेक और आपके बदले हुए नियमों को हरी झंडी नहीं देंगे। इतना ही नहीं, कोर्ट ने 8 प्रमुख वीआईपी सड़कों पर तो फिलहाल काम रोकने का हुक्म सुना दिया, जिनमें हजीरा चौराहा से बिरला नगर पुल और फूलबाग चौपाटी जैसी मुख्य सड़कें शामिल हैं।
क्यों? क्योंकि इन सड़कों की पहले क्वालिटी जांच होनी है!
अदालत ने तीखा तंज कसा कि नगर निगम ग्वालियर के बाशिंदों को अच्छी सड़कें देने को तैयार ही नहीं दिखता। खैर, आख़िरकार कोर्ट ने अफसरों के शॉर्टकट वाले इरादों पर पानी फेरते हुए, बिना उनकी शर्तों को माने 116 सड़कों की मरम्मत की अनुमति तो दे दी है, ताकि जनता को राहत मिले।
अब देखना यह है कि कोर्ट के इस चाबुक के बाद क्या ग्वालियर की किस्मत बदलेगी? या फिर हमारे नए कमिश्नर साहब अदालत की इस फटकार से आगे निकलकर कोई नया पैंतरा आजमाएंगे? ग्वालियर की जनता की नजरें अब सड़कों पर भी हैं, और निगम की चाल पर भी।
