
वॉशिंगटन, 25 मार्च। अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में चीन के साथ अपनी तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज कर दी है। अमेरिकी सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि यह मुकाबला सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि एक “नैतिक संघर्ष” भी है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन और आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
मल्टी-फ्रंट रणनीति पर जोर
वॉशिंगटन में आयोजित हिल एंड वैली फोरम में वरिष्ठ सीनेटरों ने कहा कि चीन की तकनीकी बढ़त का मुकाबला करने के लिए अमेरिका को मल्टी-फ्रंट रणनीति अपनानी होगी। इसमें
- एक्सपोर्ट कंट्रोल
- घरेलू निवेश
- सहयोगी देशों के साथ तालमेल
जैसे कदम शामिल हैं।
एआई की दौड़ को बताया ‘दूसरा शीत युद्ध’
सीनेटर जिम बैंक्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ को भू-राजनीतिक नजरिए से बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा,
“हम चीन को यह दौड़ जीतने नहीं दे सकते। यह असल लड़ाई है।”
उन्होंने ट्रंप प्रशासन के एआई एक्शन प्लान का भी जिक्र किया, जिसमें चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों के लिए एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स पर कड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल का प्रस्ताव है।
बैंक्स के अनुसार, उनका प्रस्तावित गेन एआई एक्ट इन प्रतिबंधों को और मजबूत बनाने के लिए जरूरी है। यह एक्ट पहले ही राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम के हिस्से के रूप में सीनेट में पास हो चुका है।
‘यह सिर्फ तकनीकी नहीं, नैतिक लड़ाई’
बैंक्स ने कहा कि इस प्रतिस्पर्धा में दांव सिर्फ नवाचार या बाजार की बढ़त तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा, “यह केवल तकनीकी रेस नहीं, बल्कि एक नैतिक लड़ाई भी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी की मदद न कर रहे हों।”
सप्लाई चेन में चीन पर निर्भरता चिंता का विषय
हाउस सिलेक्ट कमेटी ऑन चाइना के चेयरमैन जॉन मूलेनार ने कहा कि अमेरिका को अपनी सप्लाई चेन में चीन पर निर्भरता कम करनी होगी।
उन्होंने कहा, “हम कई अहम क्षेत्रों में अपने ही प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पर निर्भर हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर तकनीकी बढ़त हासिल न कर सके।”
मूलेनार ने यह भी कहा कि इस प्रतिस्पर्धा में अमेरिका को रक्षा रणनीति जैसी सोच अपनानी होगी और हर संभव साधन का इस्तेमाल करना होगा।
बायोटेक्नोलॉजी में भी बढ़ रहा मुकाबला
यह प्रतिस्पर्धा अब बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रही है। नेशनल सिक्योरिटी कमीशन ऑन इमर्जिंग बायोटेक्नोलॉजी के चेयरमैन सीनेटर टॉड यंग ने कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने उभरती तकनीकों में बढ़त बनाए रखने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
तकनीकी क्षेत्रों को ‘रणनीतिक बैटलग्राउंड’ माना जा रहा
फोरम में हुई चर्चाओं से यह साफ हुआ कि वॉशिंगटन में अब एआई, सेमीकंडक्टर और बायोटेक्नोलॉजी को चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन तकनीकी क्षेत्रों में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
