प्रस्तावना

सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों के लिए सुरक्षित पनाहगाह साबित हो रहे हैं। सोमवार को दोनों कीमती धातुएं नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू वायदा बाजार दोनों जगह तेजी का सिलसिला बना हुआ है। खास बात यह है कि बीते एक साल में इन धातुओं ने निवेशकों को रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं और अभी भी ट्रेंड मजबूती का संकेत दे रहा है।
घरेलू बाजार में रिकॉर्ड
सुबह 10:43 बजे एमसीएक्स पर सोने और चांदी के कॉन्ट्रैक्ट ने ऐतिहासिक स्तर छू लिए।
- सोना (5 दिसंबर 2025 कॉन्ट्रैक्ट): 0.77% की तेजी के साथ ₹1,15,775 प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
- चांदी (5 दिसंबर 2025 कॉन्ट्रैक्ट): 0.89% की तेजी के साथ ₹1,43,147 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
यह स्तर घरेलू निवेशकों के लिए न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि बाजार की मजबूती का भी संकेत देता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति
अमेरिकी बाजार कॉमैक्स पर भी सोना-चांदी मजबूत बने हुए हैं।
- सोना: 0.70% चढ़कर $3,835 प्रति औंस।
- चांदी: 0.89% बढ़कर $47.07 प्रति औंस।
इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर भी सेफ हेवन डिमांड (सुरक्षित निवेश की मांग) तेजी को सपोर्ट कर रही है।
बीते समय का प्रदर्शन
सोना और चांदी की कीमतों में हाल के महीनों और सालभर का प्रदर्शन निवेशकों को हैरान कर रहा है।
1 महीने का रिटर्न
- सोना: +10%
- चांदी: +20%
1 साल का रिटर्न
- सोना: +40%
- चांदी: +50%
यानी जिन्होंने एक साल पहले निवेश किया, उन्होंने शानदार लाभ कमाया।
तेजी की वजहें
1. वैश्विक अस्थिरता
- अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता।
- भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और टैरिफ की नीतियां।
2. निवेशकों का रुझान
- इक्विटी और क्रिप्टो में अस्थिरता बढ़ने से निवेशक सोने-चांदी में शरण ले रहे हैं।
- केंद्रीय बैंकों द्वारा रिजर्व बढ़ाने से मांग में तेजी आई है।
3. अमेरिकी नीतियां
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ ने बाजार को और अस्थिर बनाया।
- डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव ने सोना-चांदी को सपोर्ट किया।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना-चांदी का ट्रेंड अभी मजबूत है।
- सोने का सपोर्ट स्तर: ₹1,12,500
- सोने का रेजिस्टेंस स्तर: ₹1,15,000 (जो अब टूट चुका है)
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी जीडीपी डेटा मजबूत आने के बाद थोड़ी गिरावट जरूर आई थी, लेकिन तुरंत रिकवरी ने संकेत दिया कि बाजार में तेजी का स्ट्रक्चर बरकरार है।
निवेशकों के लिए अवसर
अल्पकालिक दृष्टि
- आने वाले महीनों में भी अस्थिरता बनी रहेगी।
- शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में सोने-चांदी अच्छे अवसर दे सकते हैं।
दीर्घकालिक दृष्टि
- सोना और चांदी हमेशा मुद्रास्फीति और आर्थिक संकट में सुरक्षित माने जाते हैं।
- दीर्घकालिक निवेशक अभी भी इन स्तरों पर आंशिक निवेश कर सकते हैं।
पोर्टफोलियो संतुलन
विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी निवेशक को अपने पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा सोना-चांदी में रखना चाहिए ताकि जोखिम संतुलित रहे।
भारत में सोने-चांदी का महत्व

भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और संस्कृति से जुड़ा है।
- शादियों और त्योहारों पर सोने की खरीदारी शुभ मानी जाती है।
- ग्रामीण भारत में सोना बचत और सुरक्षा का प्रमुख साधन है।
- चांदी भी घरेलू और औद्योगिक दोनों उपयोगों में अहम है।
आने वाले समय की संभावनाएं
- वैश्विक अस्थिरता और भू-राजनीतिक संकट जारी रहे तो सोना-चांदी नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।
- यदि डॉलर मजबूत हुआ तो थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन ट्रेंड लंबे समय तक पॉजिटिव रहने की संभावना है।
- भारत जैसे देशों में त्योहारों और शादी सीजन से डिमांड और बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
सोना और चांदी ने एक बार फिर साबित किया है कि वे हर दौर में निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प हैं।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों जगह कीमतें नए ऑल-टाइम हाई पर हैं।
- बीते एक महीने और सालभर का प्रदर्शन निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दे चुका है।
- विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।
इसलिए चाहे आप अल्पकालिक ट्रेडर हों या दीर्घकालिक निवेशक, सोना-चांदी फिलहाल आपके पोर्टफोलियो में होना जरूरी है।
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