मंडी की दिशा बैठक में विकास कार्यों में देरी पर सांसद कंगना रनौत अधिकारियों पर भड़क उठीं। उन्होंने साफ कहा कि बैठकें सिर्फ औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, अब जमीन पर विकास कार्य दिखाई देने चाहिए।

हिमाचल प्रदेश के मंडी में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत का अधिकारियों के प्रति नाराजगी भरा अंदाज देखने को मिला। विकास योजनाओं की धीमी रफ्तार और सरकारी फंड के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
बैठक के दौरान कंगना रनौत ने पिछली दिशा बैठकों में लिए गए फैसलों और दिए गए सुझावों की प्रगति पर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जिन मुद्दों पर पहले भी चर्चा हो चुकी है, उन पर अब तक अपेक्षित काम क्यों नहीं हुआ।
‘बैठक में सिर्फ बातें नहीं, जमीन पर काम दिखे’
कंगना रनौत ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि दिशा की बैठक केवल औपचारिकता पूरी करने का माध्यम नहीं है। उन्होंने कहा कि बैठक में योजनाओं पर चर्चा के बाद उनकी वास्तविक स्थिति में बदलाव दिखाई देना चाहिए। सांसद ने कहा कि केवल योजना बनाना या सुझाव देना पर्याप्त नहीं है। जब तक संबंधित योजनाओं को समय पर लागू नहीं किया जाता और उसका फायदा आम लोगों तक नहीं पहुंचता, तब तक विकास का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों से पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों की समीक्षा करने और उनकी मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
बैठक में सरकारी धन के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठा। कंगना ने उन परियोजनाओं को लेकर नाराजगी जताई, जिनके लिए केंद्र से फंड मिलने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से ऐसे मामलों की विस्तृत सूची तैयार करने को कहा, जिनमें जमीन से जुड़े विवाद, अनुमति, एनओसी या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण विकास कार्य अटके हुए हैं। सांसद ने कहा कि किसी भी परियोजना के लंबित रहने की वजह स्पष्ट होनी चाहिए और उसे दूर करने के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
40 से 80 प्रतिशत तक पूरे कामों की अलग सूची
कंगना रनौत ने विकास परियोजनाओं की प्रगति को लेकर अधिकारियों को अलग-अलग सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि 40, 50, 60 और 80 प्रतिशत तक पूरे हो चुके कार्यों की अलग-अलग सूची बनाई जाए। इसके साथ ही प्रत्येक लंबित परियोजना के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन-सा काम किस स्तर पर अटका है और उसे पूरा करने में कितने समय की जरूरत है।
‘पैसा वापस आने तक मामला खत्म नहीं’
सरकारी राशि से जुड़े मामलों पर भी कंगना ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सिर्फ किसी को राशि वापस करने का निर्देश देना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना था कि जब तक संबंधित राशि वास्तव में सरकारी खाते में वापस नहीं आती, तब तक उस मामले को पूरी तरह निपटा हुआ नहीं माना जाना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर अधिक जवाबदेही के साथ काम करने का संदेश दिया।
अधिकारियों को दी नियमित समीक्षा की चेतावनी
कंगना रनौत ने कहा कि मंडी संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों पर लोगों के साथ-साथ पूरे देश की नजर है। ऐसे में किसी भी विभाग की लापरवाही से गलत संदेश नहीं जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी। अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसकी रिपोर्ट उच्च स्तर तक भेजी जाएगी। सांसद ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें काम की गति बनाए रखनी होगी और योजनाओं को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने पर ध्यान देना होगा।
‘अब जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए’
बैठक के दौरान कंगना रनौत ने अधिकारियों को बेहद स्पष्ट शब्दों में अपना संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब केवल बैठकों में चर्चा या दावे करने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उनकी कार्य गति धीमी नहीं होगी और अधिकारियों को भी उनके साथ कदम मिलाकर चलना होगा। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि “अब बैठकों में सिर्फ बातें नहीं, जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए।” कंगना का यह बयान विकास परियोजनाओं की धीमी रफ्तार को लेकर उनकी नाराजगी को साफ तौर पर दर्शाता है।
मंडी के विकास कार्यों पर बढ़ेगी निगरानी
दिशा बैठक में लिए गए निर्देशों के बाद अब मंडी संसदीय क्षेत्र में लंबित विकास कार्यों की निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। खासतौर पर वे परियोजनाएं जिनमें फंड उपलब्ध होने के बावजूद काम रुका हुआ है, उनकी प्रगति पर अधिकारियों को जवाब देना होगा। कंगना रनौत ने बैठक के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल फाइलों में प्रगति दिखाना नहीं, बल्कि उनका लाभ लोगों तक पहुंचाना है।
